'भारत के हितैषी हैं बराक बराक ओबामा'

2010 का यह 'प्यू ग्लोबल एटीट्यूड सर्वे" 22 देशों के नागरिकों के बीच किया गया है. चार दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंच रहे अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भारत के दस में से सात लोग भरोसा जताते हैं, जबकि दो तिहाई लोग अमरीका के बारे में अच्छी राय रखते हैं. हालांकि ज्यादातर देशों की जनता ये मानती है कि वैश्विक मामलों में अमरीका का रवैया एकतरफा रहता है. भारतीय अमरीका को बहुपक्षीय नजरिया अपनाने वाला देश मानते हैं.
सर्वे में शामिल 83 फीदसी लोगों की राय है कि अपनी विदेश नीति बनाते समय अमरीका भारत जैसे देशों के हितों को ध्यान में रखता है. हालांकि विभिन्न देशों के 73 फीसदी लोग ये मानते हैं कि बराक ओबामा वैश्विक मामलों में अच्छा काम कर रहे हैं. सर्वे के मुताबिक भारत के लोग वैश्विक मामलों में भारत की भूमिका को लेकर अच्छी राय रखते हैं और इसके आर्थिक भविष्य को लेकर आशान्वित भी हैं और मानते हैं कि भारत दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है.
हर दस में से छह भारतीयों का ये मानना है कि उनके देश की अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है. लेकिन सर्वे में शामिल केवल चीन और ब्राजील के नागरिक ही अपने देश के आर्थिक विकास के प्रति पूरी तरह संतुष्ट नजर आए. भारतीय ये भी मानते हैं कि उनके देश के सामने अभी अपराध और भ्रष्टाचार जैसी कई चुनौतियां मौजूद हैं.
2008 में मुंबई पर हुए चरमपंथी हमलों के दो साल बाद 81 फीसदी भारतीय ये मानते हैं कि चरमपंथ एक बड़ी समस्या है. सर्वे में ज्यादातर लोगों ने ये राय दी है कि मुंबई हमलों के लिए कथित तौर पर ज़िम्मेदार माना जाने वाला चरमपंथी संगठन लश्कर ए तैय्यबा आज भी देश के लिए एक बड़ा खतरा है. जबकि एक तिहाई लोग पाकिस्तान को बड़ा खतरा बताते हैं.
58 फीसदी भारतीय ये मानते हैं कि पाकिस्तान की सरकार लश्कर ए तैय्यबा जैसे चरमपंथी संगठनों का खुलकर समर्थन करती है जबकि 21 फीसदी लोगों का कहना है कि पाकिस्तान कम से कम चरमपंथी गुटों को बर्दाश्त तो करता ही है. सर्वे में हिस्सा लेने वाले ज्यादातर भारतीयों का ये भी मानना है कि अगर ये चरमपंथी संगठन भविष्य में भारत पर कोई और हमला करते हैं तो भारत को पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करनी चाहिए.
78 फीसदी भारतीय ये भी मानते हैं कि आनेवाले समय में पाकिस्तान पर चरमपंथी गुटों का कब्ज़ा हो जाएगा. हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और शत्रुता के लंबे इतिहास के बावजूद ज़्यादातर भारतीय ये मानते हैं कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार होना चाहिए और आर्थिक सहयोग बढ़ना चाहिए.












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