बालू के खनन पर रोक लगने से बड़ी परियोजनाएं अधर में
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बी. एम. मारलापाले और न्यायाधीश अमजद सईद की पीठ ने एक याचिका पर 24 सितम्बर को रोक सम्बंधी आदेश दिया था। मुंबई स्थित एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) 'आवाज फाउंडेशन' ने अदालत में यह याचिका दायर की थी। रोक के चलते निर्माण कार्यो में बाधा खड़ी हो गई है, क्योंकि बिल्डर्स महीने में केवल एक बार ही बालू की आपूर्ति कर सकते हैं।
भारत बिल्डर संघ (बीएआई) के मुंबई केंद्र ने बुधवार को कहा कि तटीय क्षेत्र अधिनियम (सीआरजे) के एक साल बाद बालू खनन को लेकर राज्यभर में रोक लगा गया है और यह लासेंसधारियों पर लागू होता है।
बीएआई के अध्यक्ष बी. जे. देवकर ने कहा है कि बालू के खनन पर रोक लगाए जाने से कुछ बड़ी परियोजनाओं के लागत और उनके समय पर पूरा होने पर असर पड़ेगा। मसलन मोनोरेल, मेट्रो, मुंबई सी-लींक, झुग्गी बस्ती पुर्नवास और किफायती आवास परियोजनाओं और 20,000 से अधिक पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के काम में देरी हो सकती है।
उन्होंने कहा, "हमने मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से कहा कि इस मामले पर गंभीरता से विचार करें और बालू की जगह कोई और सामग्री इस्तेमाल करने का वैकल्पिक सुझाव दें।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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