नक्सलियों ने रिहाई की समयसीमा 24 घंटे बढ़ाई

इससे पहले नक्सलियों ने पुलिसकर्मियों की रिहाई के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था जिसकी अवधि मंगलवार शाम खत्म हो गई थी। सरकार द्वारा स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के जरिए नक्सलियों से बातचीत के सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
नक्सलियों ने चार पुलिसकर्मियों सहायक सब इंस्पेक्टर सुखरुराम भगत, कांस्टेबल नरेंद्र भोसले, सुभाष पात्रे और बी टोप्पो की सुरक्षित रिहाई के बदले अपनी कुछ शर्तें सरकार के सामने रखीं थीं।
इसमें माओवादियों के खिलाफ चलाया जा रहे ऑपरेशन ग्रीनहंट को बंद करने, जेल मे बंद नक्सली नेताओं की रिहाई, छत्तीसगढ़ के बस्तर से सुरक्षा बलों की वापसी और शांतिवार्ता की बातचीत की मांग रखी गई थी।
नक्सलियों ने 19 सितम्बर को बीजापुर के भोपालपटनम इलाके से सात पुलिसकर्मियों को अगवा कर लिया था। बाद में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई। पुलिस नक्सलियों का पता लगाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ले रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने दावा किया है कि वह इस संकट से उबरने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के बराबर संपर्क में है। खुफिया जानकारी के अनुसार नक्सली अगवा पुलिसकर्मियों को छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रहे हैं।
इस बीच अगवा पुलिसकर्मियों के परिजनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने नक्सलियों से अपने प्रियजनों की रिहाई के लिए गुहार लगाई है। राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सलियों से आग्रह किया है कि उन्हें पुलिसकर्मियों को मानवीयता के आधार पर रिहा कर देना चाहिए।












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