राष्ट्रमंडल खेल : अफ्रीकी एथलीट सुरक्षा को लेकर अभी भी चिंतित
खिलाड़ियों का कहना है कि बंदोबस्त से वे खुश हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर फिर भी भयभीत हैं।
कुछ अफ्रीकी देशों ने भारत में खेलों के दौरान सुरक्षा समस्याओं को लेकर कनाडा, न्यूजीलैंड और स्कॉटलैंड जैसी टीमों के सुर में सुर मिलाए हैं।
कैमरून के तिहरी कूद एथलीट माम्बा हुगो सुरक्षा संबंधी समस्याओं से अच्छी तरह परिचित हैं, क्योंकि उनके देश के 10 क्षेत्रों में आधे हिस्से में अशांति कायम है।
हुगो ने खेलगांव में आईएएनएस को बताया, "आज सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ विकासशील देशों तक सीमित नहीं है। सुरक्षा का मुद्दा अब वैश्विक हो गया है। इसलिए दुनिया के किसी भी हिस्से में कोई सुरक्षित नहीं है।"
हुगो ने बताया, "इस वर्ष के प्रारंभ में टोगोलीज की फुटबाल टीम पर अंगोला में बंदूकधारियों ने हमला कर दिया था। इससे यह जाहिर होता है कि खिलाड़ियों को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है।" हुगो ने यह भी कहा कि खेलगांव में सुरक्षा बंदोबस्त से वह खुश हैं।
हुगो ने कहा, "अपने देश में भी हम गंभीर सुरक्षा समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन हम वहां सभी मुद्दों को जानते हैं। लेकिन भारत हमारे लिए एक अनजानी जगह है और ऐसे में सुरक्षा एक मुद्दा है।"
अन्य खिलाड़ियों की तरह हुगो को भी भारत आने को लेकर हिचक थी। उन्होंने कहा, "लेकिन सौभाग्यवश मेरे कुछ मित्रों ने कुछ महीने पहले दिल्ली का दौरा किया था और उन्होंने मुझे बताया था कि दिल्ली जाना सुरक्षित है।"
हुगो और उनकी टीम के साथी एडम इद्रिसा, जो कि 100 मीटर और 200 मीटर के धावक हैं, खिलाड़ियों के कही आने-जाने पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर नाखुश हैं।
हुगो ने कहा, "इस वर्ष के प्रारंभ में मैंने लेबनान में एक प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया था, जो कि बहुत अशांत देश है लेकिन वहां हमें मुक्त रूप से विचरण की छूट थी। लेकिन यहां ऐसा नहीं है और इस कारण हम असहज महसूस कर रहे हैं।"
एडम ने हुगो की बात से सहमति जताई और कहा कि आयोजकों को भारी सुरक्षा के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा, "हमें यह स्वीकार करना है कि 1972 के म्यूनिख ओलंपिक से स्थितियां बदल गई हैं। खिलाड़ी के नाते हमें इन परिस्थितियों में जीना है लेकिन मैं कामना करता हूं कि खिलाड़ियों के विचरण पर प्रतिबंध न लगे।"
केन्या के निशानेबाज फारूक कासम भी महसूस करते हैं कि सुरक्षा दमघोटूं है। कासम की जड़े भारत से जुड़ी हुई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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