पूर्व सांसद ने की माकपा की मान्यता समाप्त करने की मांग
पूर्व माकपा सांसद के. एस. मनोज ने चुनाव आयोग में दायर अपनी याचिका में मांग की है कि माकपा को निर्देश दिया जाए कि वह 'रेक्टीफिकेशन डाक्युमेंट' में अपने सदस्यों को दिए दिशा-निर्देश में धार्मिक विश्वास पर अपने रुख को संशोधित करे।
मनोज ने कहा है कि पार्टी पदाधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को दिए गए दिशा-निर्देश में कहा गया है कि "उन्हें धार्मिक समारोह नहीं आयोजित करना चाहिए और धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। यह निर्देश संविधान में प्रदत्त धार्मिक आजादी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।"
मनोज ने कहा कि यदि माकपा धार्मिक विश्वास पर अपने रुख में सुधार नहीं करती है, तो चुनाव आयोग को राजनीतिक पार्टी के रूप में इसकी मान्यता समाप्त कर देनी चाहिए। यह दिशा-निर्देश माकपा की केंद्रीय समिति द्वारा अपने 'रेक्टीफिकेशन डॉक्युमेंट' में जारी किया गया था।
ज्ञात हो कि मनोज ने 12 सितम्बर को कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया था। वर्ष 2004 में मनोज माकपा के टिकट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.एम.सुधीरन को केरल के अलाप्पुझा संसदीय क्षेत्र से पराजित कर लोकसभा में पहुंचे थे।
मनोज ने राजनीतिक विचारधारा और धार्मिक विश्वास को लेकर पैदा हुए टकराव के बाद जनवरी महीने में माकपा से इस्तीफा दे दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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