प्रधान बनना है तो गीता और कुरान की कसम खाओ!
त्रिस्तरीय चुनाव में इस बार ग्राम प्रधान पदों पर जमकर रस्सा-कसी हो रही है। प्रत्याशी वोटों को कब्जे में करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। कोई मुफ्त शराब पिला रहा है तो कोई अपने वोटरों को दावत देने में मशगूल है। प्रत्याशी भी झूठे वादे कर चुनाव जीतने का सपना देख रहे हैं।
इस चुनाव में प्रत्याशी जहां मतदाताओं के संस्कारों को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं मुजफ्फरनगर के ऊन क्षेत्र के गांव चौसाना में ग्रामीण मतदाता अपने भावी प्रधान को धार्मिक स्थलों पर ले जाकर गीता और कुरान की कसम खिलाते हैं कि वह अगर प्रधान बना तो गांव को जाति-धर्म की राजनीति से दूर रखेगा और विकास के लिए पूरा पैसा गांव में खर्च करेगा, कोई कमीशनखोरी नहीं होगी।
गांव के चरण सिंह, कंवरपाल ने आईएएनएस को बताया कि हमने इस शर्त का इस बार पूरा ऐलान कर दिया है। जो भी चुनाव लड़ रहा है वह वोटरों के साथ अपने धार्मिक स्थल पर जाएगा और गीता और कुरान या अपने धार्मिक गं्रथ पर हाथ रखकर इस तरह की कसम खाएगा, क्योंकि ग्राम प्रधान गांव का प्रथम नागरिक होता है और उस पर पूरे समाज को सुधारने और विकास करने की जिम्मेदारी होती है।
गांव के मास्टर विजय सिंह का कहना है कि इस मुहिम में पूरा गांव एक साथ है। ग्राम प्रधान कसम खाने के बाद भी अपने वायदे पूरे नहीं करता है तो गांव के निवासी चुनाव जीतने के बाद ऐसे ग्राम प्रधान का सार्वजनिक बहिष्कार भी करेंगे। ग्रमीणों की इस पहल के बाद चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी भी असमंजस में हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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