विदेशी बीमा कम्पनी के एजेंट पर पॉलिसी बेचने पर रोक
रेडियंट ओवरसीज ने बीमा नियामक विकास प्राधिकरण (इरडा) के पास युक्रेन की कम्पनी युक्रेनमेड्स्ट्राख की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी बेचने संबंधी आवेदन दिया था। इरडा ने इस पर अनुमति देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद रेडियंट ओवरसीज ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि विदेशी कम्पनी बिना इरडा की अनुमति लिए भारत में किसी एजेंट के जरिये बीमा व्यवसायय नहीं कर सकतीं।
न्यायालय ने कहा कि कम्पनी को इसके लिए बीमा नियामक से लाइसेंस लेने की जरूरत है।
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता रेडियंट ओवरसीज ने युक्रेन की कंपनी के साथ एक समझौता किया था जिसके तहत वह भारत में कंपनी के एजेंट के तौर पर काम कर सकती है और पॉलिसी से संबंधी प्रीमियम संग्रह कर सकती है। इसके एवज में युक्रेन जाने वाले लोगों को वहां बिना शुक्ल चिकित्सा बीमा सुविधा मिलता।
भारतीय कंपनी इस संबंध में रुपये में प्रीमियम संग्रह कर विदेशी कम्पनी को डॉलर में भुगतान करती थी।
कम्पनी ने दलील दी कि कानून के मुताबिक भारत सरकार किसी कम्पनी को यह अनुमति देती है कि चिकित्सा बीमा के लिए वसूले गए प्रीमियम को वह विदेशी कम्पनी को जमा कराए। कम्पनी ने दलील में कहा कि चूंकि उसने भारत सरकार से इस संबंध में अनुमति ली है इसलिए इरडा के नियम उस पर लागू नहीं होते।
न्यायालय ने हलांकि कम्पनी की इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि चूंकि रेडियंट ओवरसीज प्रीमियम संग्रह करती है और सर्टिफिकेट जारी करती है ऐसे में उसे विदेशी कम्पनी का एजेंट नहीं कहा जा सकता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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