हिंदुओं पर हमला मामले में बीएनपी नेता की गिरफ्तार संभव
मीडिया में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच दल के समक्ष प्रस्तुत हुए कई सारे गवाहों ने मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की स्थायी समिति के सदस्य और सांसद सलाहुद्दीन कादर चौधरी का नाम लिया है कि उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों को हिंदुओं के घर तक पहुंचाया था।
एक अखबार की वेबसाइट, बीडीन्यूज24डॉटकॉम के मुताबिक चौधरी को पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया का करीबी माना जाता है। चौधरी ने इन आरोपों से इंकार किया है। यदि उनकी गिरफ्तारी हुई तो मुख्य विपक्षी पार्टी की ओर से इस मामले में प्रत्यक्ष रूप से फंसने वाले वह पहले व्यक्ति होंगे।
ज्ञात हो कि 13 अप्रैल, 1971 को चित्तागांग के पास स्थित रावजान उपजिले के तीन गांवों में कम से कम 107 हिंदुओं को मार डाला गया था और उनके घर नष्ट कर दिए गए थे। सात जांचकर्ताओं के एक दल ने उस स्थान का दौरा किया, जहां हत्या की ये घटनाएं घटी थीं।
ये जांचकर्ता बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय युद्ध अपराध न्यायाधिकरण के हिस्सा हैं। यह न्यायाधिकरण उन लोगों के खिलाफ मुकदमे की तैयारी कर रहा है, जिन्होंने बांग्ला मुक्ति संग्राम के दौरान निहत्थे नागरिकों पर हमला किया था।
न्यायाधिकरण के अभियोजक एवं सात जांचकर्ताओं के दल के सदस्य जयाद अल मालुम ने शनिवार को कहा, "हमें फजलुल कादर चौधरी के परिवार, उनके बेटे सलाहुद्दीन कादर चौधरी और जमात नेता मीर काशिम अली के युद्ध अपराधों में लिप्त होने के बारे में जानकारी मिली है।"
पाकिस्तान मुस्लिम लीग के पूर्व प्रमुख फजलुल कादर, एकीकृत पाकिस्तान के समर्थक थे और वह बांग्ला मुक्ति संग्राम के खिलाफ थे। युद्ध अपराधों के हजारों आरोपियों में वह एक हैं, जो फिलहाल जीवित नहीं हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या सलाहुद्दीन कादर और मीर काशिम को गिरफ्तार किया जाएगा, मालुम ने कहा, "उन लोगों को भी उन्हीं आरोपों का सामना करना पड़ेगा, जिसका सामना पांच अन्य लोगों ने किया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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