कश्मीरियों को अमन की उम्मीद, अलगाववादियों का अड़ियल रुख
श्रीनगर के एक दुकानदार बशीर अहमद भट्ट का कहना है, "मैं यही उम्मीद और दुआ करता हूं कि कश्मीर में अमन बहाल हो और मौत व बर्बादी का मंजर थम जाए।"
भट्ट ने कहा, "यह कहना कठिन है कि सरकार की घोषणा का जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा लेकिन मैं इससे बेहतरी की उम्मीद करता हूं। मेरी यही दुआ है।"
इसी तरह स्थानीय निवासी नजीर अहम कहते हैं, "अगर सभी पक्ष गंभीर हों तो कश्मीर समस्या का ही ढूंढ़ना मुश्किल नहीं है। अभी भी देर नहीं हुई है। किसी को हमे उस पीड़ा से मुक्त कराने के लिए आगे आना चाहिए जिसका हम लागातार सामना कर रहे हैं।"
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने शनिवार को घाटी के लिए आठ सूत्री प्रस्ताव का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पथराव करने वाले युवकों को रिहा करने के साथ ही 11 जून की बाद की हिंसा में मारे लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये दिए जाएंगे। घाटी में सुरक्षा बलों के साथ झड़प में 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
केंद्र सरकार ने जम्मू एवं कश्मीर की सरकार से कहा है कि वह एकीकृत कमान की बैठक बुलाए। इस बैठक में घाटी में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और सशत्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) के भविष्य पर भी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से भी एकीकृत कमान की बैठक बुलाने का फैसला कर लिया गया है।
राज्य की मुख्य विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने सरकार की घोषणा का स्वागत किया है। पार्टी के नेता नईम अख्तर ने कहा, "यह एक अच्छी शुरुआत है। किसी भी समस्या के समाधान के लिए अच्छी शुरुआत का होना जरूरी है।"
अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा कि नई दिल्ली ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह कश्मीर मसले का हल करने को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा, "यहां कोई आर्थिक पैकेज के लिए अपनी जान नहीं देता है। चिदम्बरम की घोषणा तो हमारी बुनियादी मांगों के मुताबिक भी नहीं है।"
उधर, दो अन्य अलगाववादी नेताओं मीरवाइज फारुख और यासीन मलिक ने कहा है कि वे पैकेज की समीक्षा के लिए एक बैठक बुलाएंगे और फिर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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