अलगाववादियों और प्रशासन के बीच तारीखों की लड़ाई
कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने गुरुवार और शुक्रवार को सामान्य जनजीवन जारी रखने के लिए लोगों से विरोध प्रदर्शन न करने की अपील की थी लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इन दिनों में घाटी में कर्फ्यू जारी रखा।
लोगों को दैनिक उपयोग के सामान खरीदने का समय नहीं मिल पाने के कारण गिलानी ने अपने विरोध कैलेंडर में बदलाव करते हुए अब शनिवार और रविवार को विरोध न करने के दिनों में तब्दील किया है।
घाटी के लोग प्रशासन द्वारा कर्फ्यू जारी रखने और अलगाववादी नेता गिलानी के सामान्य गतिविधियां शुरू करने की घोषणाओं को 'तारीखों की लड़ाई' का नाम दे रहे हैं।
श्रीनगर शहर के राजबाग इलाके के निवासी अब्दुल मजीद ने कहा, "यह सरकार और गिलानी साहब के बीच सीधे-सीधे तारीखों की लड़ाई है।"
उन्होंने कहा, "गिलानी जब सामान्य दिन की घोषणा करते हैं तो प्रशासन कर्फ्यू लगा देता है और प्रशासन जब घाटी में सामान्य हालात की अपील करता है तो गिलानी विरोध प्रदर्शन आयोजित करते हैं।"
घाटी में 11 जून के बाद से बिगड़े हालातों में अलगाववादी नेता पिछले तीन महीने से अपने 'कश्मीर छोड़ो' अभियान के तहत विरोध की तारीखें जारी कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी अलगाववादियों के इस कैलेंडर को मान्यता दे रहे हैं। यह कैलेंडर साप्ताहिक आधार पर जारी किया जा रहा है जिसमें सप्ताह के पांच दिन विरोध प्रदर्शन और दो दिन सामान्य गतिविधियों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने कहा, "अब तक प्रशासन गिलानी द्वारा विरोध के लिए घोषित दिनों में कर्फ्यू लगाता था और सामान्य दिनों की घोषणा के दिनों में कर्फ्यू हटा लेता था इससे गलत संदेश जा रहा था। इसलिए प्रशासन ने अब गिलानी के विरोध कैलेंडर को मात देने का फैसला किया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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