एयर इंडिया हादसा: अभियुक्त झूठ बोलने के दोषी

एयर इंडिया हादसा: अभियुक्त झूठ बोलने के दोषी
वर्ष 1985 में एयर इंडिया विमान में विस्फोट करने के लिए बम बनाने में सहायता करने वाले कनाडा के एक व्यक्ति को अदालत में झूठ बोलने का दोषी पाया गया है.

एटलांटिक महासागर के ऊपर एयर इंडिया के विमान में हुए इस विस्फोट की वजह से विमान में सवार 300 से अधिक यात्री मारे गए थे. कनाडा के प्रांत ब्रिटिश कोलंबिया में डनकैन के निवासी 58 वर्षीय इंद्रजीत सिंह रेयात को वर्ष 2003 में लोगों की जान लेने का दोषी पाए जाने के बाद छह साल की सज़ा सुनाई गई थी.

बाद में दो सिख अलगावादियों के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे में बयान देते हुए उन्होंने कहा था कि वे बम के बारे में कुछ नहीं जानते. उनका कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि बम क्यों लाया गया और इसकी योजना किसने बनाई थी. इसके बाद दो व्यक्ति जिनके ख़िलाफ़ इस बारे में मामला चल रहा था - अजैब सिंह बागड़ी और रिपुदमन सिंह मलिक - को दोषमुक्त करार दिया गया था.

रेयात के ख़िलाफ़ अदालत में शपथ लेने के बाद झूठ बोलने का मुकदमा चला. अदालत में अभियोजन पक्ष का कहना था कि इंद्रजीत सिंह रेयत ने इस विस्फोट मामले में अकेले ही सज़ा पाई लेकिन वे अपनी भागीदारी कम बताने और दूसरों को बचाने के लिए लगातार झूठ बोलते रहे. लेकिन उनके वकीलों का कहना था कि अंग्रेज़ी समझ में न आने की वजह से उन्हें भ्रम हो गया था.

दो दिनों की सुनवाई के बाद जब अदालत ने उन्हें दोषी क़रार दिया तो 58 वर्षीय रेयत ने ख़ामोशी के साथ इसे सुना. उन्हें हिरासत में ले लिया गया है और उन्हें सज़ा बाद में सुनाई जाएगी. संवाददाताओं का कहना है कि अदालत में झूठ बोलने के मामले में अधिकतम सज़ा तो 14 सालों की है लेकिन आम तौर पर अदालतें दो से तीन साल की सज़ा सुनाती है.

एयर इंडिया की उड़ान संख्या - 182 ने जून 1985 में कनाडा से भारत के लिए उड़ान भरी थी लेकिन विस्फोट के बाद यह आयरलैंड के पास अटलांटिक महासागर में गिर गया था और इसमें सवार सभी यात्री मारे गए थे. इसी समय जापान में एक बम समय से पहले फट गया था जिससे विमान में सामान चढ़ाने वाले दो व्यक्ति मारे गए थे.

जाँच में बहुत सी परेशानियों के बाद वर्ष 2005 में दो सिख अलगाववादियों - रिपुदमन सिंह मलिक और अजैब सिंह बागड़ी पर कई आरोपों के साथ मुक़दमा चलाया गया था लेकिन सुबूत न होने की वजह से बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था. जापान में हुए विस्फोट के लिए रेयात को ब्रिटेन की अदालत ने 1991 में दस साल की सज़ा सुनाई थी.

वर्ष 2003 में कनाडा की एक अदालत ने उन्हें लोगों की जान लेने का दोषी पाया था और पाँच साल की सज़ा सुनाई थी. वर्ष 2006 में उनके ख़िलाफ़ अदालत में झूठ बोलने का मुक़दमा शुरु किया गया था. जुलाई 2008 से वे ज़मानत पर जेल से रिहा कर दिए गए थे. इसी साल जून में इस मामले की जाँच के दौरान कहा गया था कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसी की एक के बाद एक ग़लतियों की वजह से यह हादसा हुआ.

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