'बाबरी मस्जिद विध्वंस में राजीव गांधी का भी था हाथ'

अपनी किताब 'रिलीजन, कास्ट एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया' के लोकार्पण के दौरान लेखक डा. क्रिस्टोफ जैफ्रेलो ने कहा कि 24 सितंबर को भारत के मुस्लिमों और हिंदुओं की असली परीक्षा की घड़ी है। अयोध्या में विवादित स्थल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आना है और ऐसे समय में यह देखना है कि भारत के मुसलमानों में डर की मानसिकता बदली या नहीं। मुस्लिम अपने आपको भारत का अंग समझते हैं या नहीं।
इसी दौरान डा. जैफ्रीलो ने आरोप लगाया कि राजीव गांधी ने हिंदूओं और मुस्लिमों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने के लिए उकसाया था। सबसे पहले शाहबानो का मामला, फिर विहिप के आग्रह पर बाबरी मस्जिद का गेट खोलना और फिर फैजाबाद को राम की भूमि बताकर वहां से चुनाव अभियान शुरू करना। इन सभी जगह राजीव गांधी ने हिन्दुओं को मुसलमानों के खिलाफ और मुसलमानों को हिन्दुओं के खिलाफ खड़े होने के लिए उकसाया था।
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उन्होंने कहा कि भाजपा बिहार चुनावों को गंभीरता से ले रही है। वो उसके लिए लिटमस परीक्षण जैसा होगा। ऐसे में भाजपा को अल्पसंख्यक विरोधी कहना गलत होगा। उनकी आस्तीन में कई अन्य कार्ड भी हैं। भाजपा एक बार फिर पावर में आ सकती है, न कि अपने दम पर, बल्कि तब जब कांग्रेस फेल हो चुकी होगी।
जेफ्रलो ने कहा कि संप्रग सरकार बंट चुकी है और पैरालाइस्ड हो चुकी है, उसमें मजबूत प्रधानमंत्री नहीं है, जो अपनी टीम का ठीक से प्रबंधन कर सके।
उसने कहा कि राहुल गांधी भविष्य में प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लेकिन यह निर्भर करेगा, कि संप्रग दोबारा सत्ता में आएगी या नहीं। गांधी परिवार की वजह से ही ममता बनर्जी और शरद पवार कांग्रेस से जुड़े हुए हैं, लिहाजा कांग्रेस को राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए आगे बढ़ाना ही होगा।












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