एएफएसपीए पर भाजपा और जेठमलानी में मतभेद (राउंडअप)
नई दिल्ली, 12 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जम्मू एवं कश्मीर के कुछ हिस्सों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (एएफएसपीए) को हटाए जाने को लेकर दो राय सामने आई है। जहां पार्टी नेताओं ने इस कानून को राज्य के किसी भी हिस्से से हटाए जाने के प्रति सरकार को चेताया है, वहीं भाजपा सांसद राम जेठमलानी ने इसे 'उपयोगी जोखिम' करार दिया।
लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरूण जेटली जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की सोमवार को प्रस्तावित बैठक के पूर्व एक आपात बैठक की और कहा कि केंद्र सरकार के पास कश्मीर के हालात से निपटने की कोई दृष्टि नहीं है।
पार्टी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "राष्ट्र के लिए चिंता की बात यह है कि समस्या की गंभीरता को महसूस करने और उसके समाधान की कोशिश करने के बदले केंद्र सरकार इस भ्रम में जी रही है कि वह एएफपीएसए को कमजोर कर अलगाववादियों को संतुष्ट कर सकती है।"
भाजपा ने कहा कि राज्य के हालात के बारे में दो अलग-अलग दृष्टि है। "एक सेना और सुरक्षा कर्मियों की जिसका प्रतिपादन रक्षा मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है और दूसरी दृष्टि कांग्रेस की है, जो वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित है।"
बयान में कहा गया है, "अब पूरा राष्ट्र इस ओर नजरे गड़ाए हुए है कि सोमवार को प्रस्तावित सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति में कौन-सी दृष्टि हावी होती है।"
बयान में कहा गया है, "सरकार को किसी भी परिस्थिति में राज्य के किसी भी संकटग्रस्त जिले से एएफएसपीए को उठाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। सुरक्षा का वातावरण हर हाल में चुस्त किया जाना चाहिए, उपद्रवियों को भय महसूस होना चाहिए।"
इस मामले में हालांकि राम जेठमलानी की सोच विपरीत है। उन्होंने यहां आयोजित एक कार्यक्रम के इतर मौके पर कहा, "हमें सशस्त्र बलों के लोगों के आत्मविश्वास को नहीं डिगाना है, लेकिन एएफएसपीए को आंशिक रूप से उठाए जाने का प्रयोग उपयोगी हो सकता है।"
जेठमलानी ने कहा, "सबकुछ पथराव करने वालों पर और उन्हें उकसाने वाले लोगों पर निर्भर करता है। यदि उनकी प्रतिक्रिया अनुकूल होती है तो यह जोखिम उपयोगी है।"
भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हटाए जाने की भी मांग की है। भाजपा ने कहा है कि पिछले तीन महीनों से कश्मीर की स्थिति अचानक बिगड़ी है।
पार्टी की ओर से कहा गया है, "सीमा पार से समर्थन पा रहे अलगाववादी समूहों ने घाटी में हिंसा और आतंकवाद का माहौल खड़ा किया है। एक अलोकप्रिय मुख्यमंत्री अपनी जनता से पूरी तरह कट जाता है। ऐसे समय में उनकी जगह किसी अधिक लोकप्रिय व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।"
भाजना नेताओं ने दावा किया कि अलगाववादी आजादी के अपने घोषित लक्ष्य को साकार करने की कोशिश में देश के साथ राज्य के राजनीतिक रिश्ते को कमजोर करना चाहते हैं।
यह बैठक आडवाणी के आवास पर संपन्न हुई। बैठक में पार्टी नेता एस.एस.अहलूवालिया और रविशंकर प्रसाद ने भी हिस्सा लिया।
इसके पहले प्रसाद ने मुख्यमंत्री उमर अब्दु़ल्ला की आलोचना की थी।
उन्होंने कहा था कि राज्य में ईद के मौके पर जब घाटी में फिर से हिंसा भड़क उठी और कई स्थानों पर सरकारी इमारतों को आग लगाया गया, उस समय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला श्रीनगर में हिंसा पर नियंत्रण करने के बदले दिल्ली चले आए। प्रसाद ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक था।
प्रसाद ने कहा था, "एएफएसपीए में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी और राजनीतिक दबाव में उन सुरक्षा बलों के आत्मविश्वास के साथ समझौता करने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए, जिन्होंने आतंकियों के साथ लड़ाई में अपनी जान कुर्बान की है।"
ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में होने वाली सीसीएस की बैठक में कश्मीर के हालात पर चर्चा होगी और राज्य के कुछ हिस्सों से एएफएसपीए के हटाए जाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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