समसामयिक मुद्दों पर नई भाषा में कटाक्ष (पुस्तक समीक्षा)

नई दिल्ली, 12 सितम्बर (आईएएनएस)। समसामयिक मुद्दों पर चर्चित समाचार माध्यमों की अतिवादी बहस सुनकर और पढ़कर यदि आप त्रस्त हो चुके हैं तो वरिष्ठ पत्रकार प्रभात शुंगलू का लेख संग्रह 'यहां मुखौटे बिकते हैं' आपको पर्याप्त सुकून दे सकता है।

अंतिका प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस लेख संग्रह में शुंगलू ने अपनी मिश्रित जुबान में राजनीति से क्रिकेट और धर्मनिरपेक्षता से अजमल आमिर कसाब तक तमाम ज्वलंत विषयों पर ईमानदार नजरिया प्रस्तुत किया है। लेख संकीर्ण रूप से निर्णयात्मक नहीं हैं, बल्कि व्यापक आयामों को छूते नजर आते हैं। यही इन लेखों का लुभावना पहलू है। किताब में संग्रह में व्यंग्य, कटाक्ष, भावावेश, थ्रिल, असंतोष, संवेदना और राष्ट्रप्रेम जैसे अनेक तत्व लेख दर लेख सामने आते हैं।

विचारों का संतुलन इन लेखों का प्राण है। उदाहरण के तौर पर धर्मनिरपेक्षता का पैमाना हर मुद्दे पर सहमति बना रहा है जो कि सस्ते लेखन के मौजूदा समय में पंक्ति दर पंक्ति और लेख दर लेख बदलता रहता है। आडवाणी की रथयात्रा हो या राजीव का रामलला के ताले खुलवाना, गुजरात या कंधमाल के दंगे हों या मकबूल फिदा हुसैन की नागरिकता का मामला, सभी मसलों पर वही निष्पक्ष रवैया दिखता है, जिसकी उम्मीद किसी पत्रकार से की जाती है।

लेखों में न सिर्फ भारतीय राजनीति, समाज, मीडिया, व्यवस्था और धर्म के ठेकेदारों के विचलन को उजागर किया गया है, बल्कि इस विचलन के प्रत्येक परिवर्तन को रेशे-रेशे में तोड़कर पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है।

आमिर अजमल कसाब को अदालत द्वारा सुनाई गई सजा लेखक की नजर मेंसंभवत: अब तक की भीषणतम सजा है। हुसैन से यह कहना कि हुसैन तुम माफी मत मांगना, एक धर्मनिरपेक्ष भारतीय की दबी हुई इच्छा है।

प्रियंका गांधी से लेखक का 'डोंट से नो' कहना एक राष्ट्रीय मजबूरी-सा लगता है। इस राष्ट्रीय मजबूरी को लेखक ने बेझिझक उजागर किया है। न्यूज के 'हॉट' होने की अनिवार्यता को लेखक ने 'पीपली लाइव' से कहीं ज्यादा गहराई से स्पष्ट किया है। लेखक ने तो समाचार माध्यमों से न्यूज के तलाक के कारणों और परिणामों का पूरा ब्योरा भी प्रस्तुत किया है।

कारगिल युद्ध का आंखों देखा हाल और इस दौरान लेखक के अहसास और अंतर्द्वद एक रिपोर्टर की रूमानी कहानी बयान करते हैं। युद्ध की तमाम खबरें और वीडियो फुटेज वह छवि कभी स्पष्ट नहीं कर पाएंगी जो शुंगलू ने अपने लेखों से निरूपित की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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