उत्तर भारत में सैकड़ों गांव पानी में डूबे, दिल्ली में खतरा बरकरार (राउंडअप)
उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित बाराबंकी, गोंडा, बहराइच और लखीमपुर खीरी जिलों में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर लगातार बढ़ता जा रहा है। उधर असम के लखीमपुर जिले में बाढ़ के चलते करीब 30,000 लोग बेघर हो गए और प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया।
हरियाणा में शुक्रवार को यमुना नदी में जलस्तर में और बढ़ोत्तरी के चलते पानीपत जिले में करीब एक दर्जन गांव पानी में डूब गए। हरियाणा सरकार ने नदी में एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा है। वहीं यमुनानगर जिले के उपायुक्त अशोक सांगवान ने बताया कि जिले के 60 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है और पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
सांगवान ने बताया कि यमुना में पानी कम होना शुरू हो गया है लेकिन उसकी रफ्तार काफी धीमी है। बाढ़ का पानी अंबाला, पानीपत और सोनीपत जिलों के कुछ गांवों में भी प्रवेश कर गया है।
उधर, पंजाब में रोपड़ जिले के आनंदपुर साहिब उपमंडल के दर्जनों गांवों में सतलुज नदी का पानी प्रवेश कर गया है। लोधीपुर गांव के निकट तटबंध में आई दरार के बाद इन गांवों में पानी प्रवेश कर गया है। एक महीने पहले ही तटबंध में दरार पड़ी थी लेकिन प्रशासन इसे भरने में असफल साबित हुआ। दसग्रेन, बुर्ज, मेंहदी कलां, लोधीपुर और बाद्दल सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
असम के लखीमपुर जिले में बाढ़ की वजह से 30,000 लोग बेघर हो गए और एक व्यक्ति की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक विश्वविख्यात 'काजीरंगो राष्ट्रीय उद्यान' का बड़ा हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया है।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों द्रूपंग और सेस्सा का पानी कम से कम 40 गांवों में प्रवेश कर गया है जिससे स्थानीय लोगों को रेल की पटरियों और ऊंचाई वाले इलाकों में शरण लेनी पड़ी है।
जिले के एक अधिकारी ने बताया, "दो तटबंधों में 20 से 30 मीटर तक दरार पड़ जाने से बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर गया है। बचने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति की पानी में डूबने से मौत हो गई।" अधिकारी के मुताबिक तटबंधों की दरारें भरने के उपाय किए जा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में बारिश मंद पड़ने के साथ ही वहां से निकलने वाली नदियों में पानी का बहाव कम होने की संभावना बन गई है, इस कारण बाढ़ से जूझ रहे पंजाब और हरियाणा में हालात सुधरने की संभावना है।
मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह ने यहां आईएएनएस को बताया, "हरियाणा से लगे सिरमौर तथा पंजाब से लगे ऊपरी इलाकों में स्थित बिलासपुर, हमीरपुर व कांगड़ा जिलों में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के बाद अब अगले कुछ दिनों में पूरे राज्य में हल्की बारिश की संभावना है।"
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में घाघरा नदी पर बने भिखारीपुर-सिकरौर तटबंध के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। जिले में घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। जिले के लगभग 100 गांवों में घाघरा का पानी प्रवेश कर गया है जिससे करीब डेढ़ लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
गोंडा के सुजौली-मुहम्मदपुर गांव के पास घाघरा नदी पर बना करीब 22 किलोमीटर लंबा भिखारीपुर-सिकरौर तटबंध तेज बहाव के चलते 30 मीटर से ज्यादा कट गया है, जिसे लेकर आसपास के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
गोंडा के अपर जिलाधिकारी (वित्त) विवेक पांडे ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि बांध को बचाने के लिए बड़ी मात्रा में पत्थरों के बोल्डर और मिट्टी डाली गई है और अभी भी बोल्डर व मिट्टी डालने का सिलसिला जारी है।
उधर, बहराइच और बाराबंकी जिलों में भी घाघरा की तबाही जारी है। यहां पर 200 से अधिक गांव जलमग्न हो गए हैं। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित बाराबंकी, गोंडा, बहराइच और लखीमपुर खीरी जिलों में बाढ़ से अब तक कुल 20 मौतें हुई हैं।
दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर शुक्रवार को भी खतरे के निशान से ऊपर बना रहा और उसमें लगातार वृद्धि हो रही है जिससे शहर पर बाढ़ का खतरा मडराने लगा है लेकिन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्लीवासियों को आश्वासन देते हुए कहा है कि लोगों को चिंता करने की जरुरत नहीं है और 'स्थिति नियंत्रण में है'।
दिल्ली में शुक्रवार दोपहर तीन बजे तक यमुना का जलस्तर 205.88 मीटर तक पहुंच गया इससे एक घंटे पहले जलस्तर 205.81 मीटर दर्ज किया गया था। नदी का जलस्तर गुरुवार को खतरे के निशान 204.83 मीटर को पार कर गया था।
गौरतलब है कि वर्ष 1978 में यमुना नदी का जलस्तर 207.48 को भी पार कर गया था जिससे शहर में 250,000 लोग प्रभावित हुए थे। पूर्वी दिल्ली के उपायुक्त ने बताया कि दिल्ली के किसी इलाके में अभी बाढ़ का खतरा नहीं है।
वर्ष 1978 में आई भीषण बाढ़ में निचले इलाकों बटला हाउस, गढ़ीमांडू, शास्त्री पार्क, मदनपुर खादर, आईटीओ, राजघाट, दरियागंज, मॉडल टाउन और मुखर्जी नगर में पानी भर गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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