यमुना में उफान जारी, शीला ने कहा, चिंता की बात नहीं
दिल्ली में शुक्रवार सुबह यमुना का जलस्तर 205.60 मीटर तक पहुंच गया और शाम तक 206 मीटर तक पहुंचने की आशंका है। नदी का जलस्तर गुरुवार को खतरे के निशान 204.83 मीटर को पार कर गया था।
गौरतलब है कि वर्ष 1978 में यमुना नदी का जलस्तर 207.48 को भी पार कर गया था जिससे शहर में 250,000 लोग प्रभावित हुए थे।
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं को बताया, "स्थिति नियंत्रण में है और लोगों को चिंता करने की जरुरत नहीं है।"
उन्होंने कहा कि छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद वह स्वयं सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री राजकुमार चौहान के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। निचले इलाकों में रह रहे लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। लोगों को खाद्य सामग्री भी मुहैया कराई जा रही है।"
पूर्वी दिल्ली के उपायुक्त ने बताया कि दिल्ली के किसी इलाके में अभी बाढ़ का खतरा नहीं है।
वर्ष 1978 में आई भीषण बाढ़ में निचले इलाकों बटला हाउस, गढ़ीमांडू, शास्त्री पार्क, मदनपुर खादर, आईटीओ, राजघाट, दरियागंज, मॉडल टाउन और मुखर्जी नगर में पानी भर गया था।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी ने सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों के बारे में बताया, "लगभग 74 नावों और 68 गोताखोरों को तैयार रखा गया है। इसके अलावा हालात से निपटने के लिए 85,850 खाली सिमेंट को बोरियां, 3,582 घन मीटर पत्थर, 11 ट्रकों और 422 लाइफ जैकेट्स की व्यवस्था की गई है।"
उल्लेखनीय है कि हरियाणा के हथिनिकुंड बैराज से बुधवार को 6 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जमुना का जलस्तर चार से पांच सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री ने गुरुवार को हालांकि कहा था कि हरियाणा द्वारा छोड़े गए पानी का आधा हिस्सा ही यहां पहुंचेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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