मां के दुलार से मनुष्य को मिलता है बड़ा दिमाग

एक नए शोध में पता चला है कि बंदर का दिमाग इसलिए बड़ा होता है क्योंकि जन्म लेने के बाद उसे मां का ढेर सारा प्यार मिलता है।

इससे पहले किए गए शोध में वैज्ञानिकों ने दिमाग के बड़े आकार का संबंध तेज गति के चयापचय से जोड़ा था लेकिन कंगारू, अमेरिका में रहने वाला एक प्रकार का चौपाया-पोसम और धानी से जानवर कोख की जगह थैली में विकास करते हैं।

इसके बावजूद उनके दिमाग का आकार दूसरे स्तनधारियों की तरह तेज होता है जबकि उनकी पाचन शक्ति काफी धीमी होती है।

शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि मारसुपायल्स और प्लेसेंटल स्तनधारियों के दिमाग का आकार उन्हें उनकी माताओं द्वारा मिलने वाले दुलार पर निर्भर करता है।

मारसुपायल्स स्तनधारियों का दिमाग जन्म के बाद धीमी गति से विकास करता है जबकि प्लेसेंटल स्थनधारियों का दिमाग मां के पेट में ज्यादा तेजी से विकसित होता है।

मनुष्य और उनके सदृश्य दिखने वाले चिम्पांजी मां की कोख में काफी लंबा वक्त बिताते हैं और जन्म लेने के बाद उनकी काफी अधिक देखरेख होती है। यही कारण है कि उनका दिमाग दूसरे स्तनधारियों या जानवरों से तेज होता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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