मोबाइल को 'डिजिटल वॉलेट' बनाएंगे पित्रोदा
वर्ष 1980 में कैसियो डिजिटल डायरी का आविष्कार कर चुके पित्रोदा की कंपनी सी-सैम ने मोबाइल से पैसे के हस्तांतरण की प्रौद्योगिकी तैयार की है। यह प्रौद्योगिकी मौजूदा बैंकिंग तंत्र, क्रेडिट कार्ड, भुगतान और पैसे की पूरी अवधारणा को बदलने में सक्षम है।
पित्रोदा की इस नई खोज को उनकी नई किताब "द मार्च ऑफ मोबाइल मनी : द फ्यूचर ऑफ मोबाइल मनी" में समझाया गया है। इस किताब का विमोचन मंगलवार शाम को योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया।
किताब के विमोचन के अवसर पर पित्रोदा ने कहा, "आज आपके जो क्रेडिट और डेबिट कार्ड लिफाफे में रखकर आपको भेजे जाते हैं, भविष्य में वह कार्ड इलेक्ट्रानिक हो जाएंगे और आपके नए पते यानि मोबाइल फोन पर भेजे जाएंगे।"
"इससे बैंक, दुकानदार और उपयोगकर्ता एक ही मंच पर आ जाएंगे। ऐसा हो रहा है और अब यह लगभग सच होने वाला है।"
जन सूचना, आधारभूत संरचना और नवाचार मामलों पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार पित्रोदा ने कहा कि इस नए आविष्कार की प्रेरणा उन्हें अपनी पत्नी से मिली जो कि एक के बाद एक चैक भरने में लंबा समय खर्च करती थीं।
इसके चलते उन्होंने मोबाइल मनी के सिद्धांत के बारे में सोचा और बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल फोन और एक सुरक्षित हस्तांतरण विधि को मिलाकर एक डिजिटल वॉलेट तैयार करने तरीका विकसित किया।
सी-सैम के शिकागो मुख्यालय स्थित पित्रोदा के सहयोगी मेहुल देसाई इस किताब के सह लेखक है और हॉर्पर कॉलिंस प्रकाशन ने इसे प्रकाशित किया है।
पित्रोदा ने कहा कि 60 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं वाले देश में लेदर वॉलेट की जगह मोबाल में डिजिटल वॉलेट का होना सभी के लिए सुविधा जनक होगा। प्रौद्योगिकी के वाणिज्यिक कार्यो में प्रयोग से लोगों के सामिजिक विकास और सशक्तिकरण में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में हर साल 10 अरब कार्ड तैयार किए जाते हैं, मोबाइल वॉलेट के जरिए भविष्य में इन कार्डो की जरूरत नहीं रहेगी। इससे लागत में कमी आएगी और दक्षता बढ़ेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications