बिहार विधानसभा में नक्सली हिंसा होगी चुनौती
पटना। बिहार में छह चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती नक्सली हिंसा की होगी। पुलिस और प्रशासन इससे निपटने की तैयारियों में जुट गए हैं।
राज्य में घोषि विधानसभा चुनावों के प्रत्येक चरण में नक्सल प्रभावित इलाकों को रखा गया है। इन इलाकों में सुबह सात बजे से लेकर दोपहर बाद तीन बजे तक ही मतदान होगा। जानकार बताते हैं कि वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव की तुलना में जहां नक्सलियों की ताकत में इजाफा हुआ वहीं उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी वृद्धि हुई है।
चुनाव से ऐन पहले औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह को नक्सली संगठन द्वारा धमकी मिलना तथा नक्सलियों द्वारा विधानसभाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी पर उनके क्षेत्र में घुसने पर पाबंदी लगाना नक्सलियों की तैयारी और इरादे दर्शाता है। इधर, राज्य में विस्फोटकों की बरामदगी ने भी पुलिस के कान खड़े कर दिये हैं।
प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) पूर्व में प्रत्येक चुनाव के बहिष्कार के नाम पर अक्सर चुनावों के समय हिंसक गतिविधियों को अंजाम देता है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी नक्सलियों ने रोहतास जिले में सीमा सुरक्षा बल के एक शिविर पर हमला किया था, हालांकि इसमें किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ था।
वर्ष 2005 में राज्य में दो चुनाव हुए थे। अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 210 नक्सली घटनायें हुई थीं जिनमें 24 बार पुलिस और नक्सली आमने-सामने हुए थे। इस दौरान 22 पुलिसकर्मी शहीद हुए तो पुलिसकर्मियों ने 15 नक्सलियों को मार गिराया था। हालांकि आंकड़ों के मुताबिक 2005 के बाद नक्सली घटनाओं में कमी आई है।
सभी राजनीतिक दलों ने भी चुनाव के दौरान राज्य के प्रत्येक मतदान केन्द्र पर केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की है। घोषित चुनावी कार्यक्रम के अनुसार पहले चरण में दो, दूसरे चरण में तीन, तीसरे चरण में चार और चौथे चरण में 10 तथा पांचवें चरण में 12 और छठे चरण में 16 नक्सल प्रभावित विधानसभा क्षेत्रों को चिह्न्ति किया गया है जहां सुबह सात बजे से दिन के तीन बजे तक ही ही मतदान होगा।
इधर, राज्य के पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी के अनुसार प्रत्येक चुनाव में नक्सली चुनाव बहिष्कार की घोषणा करते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस तैयारी कर रही है तथा मतदान केन्द्रों पर भी अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की जायेगी। उनका कहना है कि राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न करवाना चुनौती है ।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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