गिलार्ड किसी तरह प्रधानमंत्री बनीं

ऑस्ट्रेलिया के तीन में से दो स्वतंत्र सांसदों ने पिछले महीने हुए चुनावों में लेबर पार्टी की नेता और कार्यवाहक प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड का समर्थन करने की घोषणा की है.
इन दोनों सांसदों के समर्थन पर ही सरकार का गठन निर्भर था. अब जूलिया गिलार्ड विधिवत नई सरकार गठित कर पाएंगी.
150 सदस्यों वाली ऑस्ट्रेलियाई संसद में गिलार्ड को सरकार बनाने के लिए आवश्यक 76 सांसदों का समर्थन हासिल हो गया है.
जबकि उनके प्रतिद्धंद्वी टोनी एबट को 73 सांसदों का समर्थन हासिल है. हाल ही में एक स्वतंत्र सदस्य ने भी उनके समर्थन की घोषणा की थी.
इन दोनों सांसदों- टोनी विंडसर और रॉब ऑकेशॉट का समर्थन कितना अहम था, उसका इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि केनबरा में समर्थन की घोषणा का टीवी पर लाइव प्रसारण किया गया.
सरकार पर तलवार
दोनों सांसदों ने बताया कि काफ़ी मशक्कत के बाद वो इस फ़ैसले पर पहुँचे हैं. उन्होंने बताया कि वे ग्रामीण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी इस क्षेत्रों से संबंधित कई मांगे मान ली गईं हैं.
दोनों ने उम्मीद जताई की मौजूदा संसद अपना कार्यकाल पूरा करेगी.
हालांकि बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इतने कम बहुमत के कारण सरकार पर हमेशा तलवार लटकी रहेगी.
उल्लेखनीय है कि अब तक लेबर पार्टी की नेता जूलिया गिलार्ड कार्यवाहक प्रधानमंत्री की भूमिका निभा रही थीं.
ऑस्ट्रेलिया में अंतिम बार ऐसी स्थिति 1940 में आई थी जब किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था.
ये चुनाव जूलिया गिलार्ड के केविन रड को लेबर पार्टी के नेतृत्व की दौड़ हराने के दो महीने बाद हुए थे.
संवाददाता का कहना था कि दो महीने पहले गिलार्ड जब सत्ता में आईं थीं तो उन्हें लगा था कि ऑस्ट्रेलिया की पहली महिला प्रधानमंत्री होने के नाते वो आम चुनाव जीत जाएंगी लेकिन लेबर पार्टी के नेतृत्व से केविन रड को हटाना उनके ख़िलाफ़ गया.
केविन रड के गृह राज्य क्वींसलैंड में लेबर पार्टी को काफ़ी नुकसान हुआ है
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक गिलार्ड को चुनौती दे रहे टोनी एबट को छह महीने पहले कोई भी दौड़ में नहीं देख रहा था लेकिन उन्होंने इस चुनाव को एक 'फ़ोटो-फ़िनिश' में तब्दील कर दिया.
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