फरीदाबाद में एचआईवी एड्स का सबसे ज्‍यादा खतरा

फरीदाबाद। यदि आप राजधानी नई दिल्‍ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइये, यहां पर एचआईवी एड्स होने का खतरा सबसे ज्‍यादा है। वर्ष 2010 में एचआईवी/एड्स के रिकॉर्ड तोड़ 120 मामले दर्ज किए गए जाने के बाद फरीदाबाद को हाई रिस्क एरिया घोषित कर दिया गया है। यहां अभी तक अगस्त में एचआईवी पॉजिटिव के 16 नए मामले सामने आए हैं। इनमें से 11 पुरुष और 5 महिलाएं हैं। इनमें से पांच टीबी के पेशेंट भी हैं।

जिले में लगातार एचआईवी/एड्स का ग्राफ बढ़ रहा है। जागरूकता के नाम पर नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) और हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी (हैक्स) करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन नतीजे विपरित ही रहा है। पल्ला झाडऩे के लिए अधिकारियों यह तर्क दे रहे हैं कि जागरूकता आ रही है, तभी लोग एचआईवी की जांच के लिए आगे बढ़ रहे हैं। एचआईवी/एड्स को लेकर लोगों में यदि जागरूकता आ रही है तो मामले घटने की बजाय बढ़ क्यों हैं इस बात का अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।

डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने की मीटिंग

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की कंसल्टेंट डॉ. सुधी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को बीके अस्पताल में एचआईवी काउंसलर और प्रमुख टीबी अधिकारी के साथ बैठक की और जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितने भी मामले पॉजिटिव पाए जाते हैं, उन्हें सही ढंग से जांच और एआरटी के लिए रेफर किया जाए। जितने भी टीबी के पेशेंट हों उनकी भी प्रॉपर तरीके से जांच हो और उन्हें एचआईवी जांच के लिए भी भेजा जाए।

महीने दर महीने बढ़ते गए मामले

कई वर्षो की तुलना में वर्ष 2009 में एचआईवी के 153 मामले दर्ज हुए थे। सरकारी अस्पताल के आंकड़ों के तहत इस साल अब तक 120 मामले सामने आए हैं। इनमें से जनवरी में आठ, फरवरी में 13, मार्च में 17, अप्रैल में 15, मई में 11, जून में 10, जुलाई में 30 और अगस्त में 16 मामले आए हैं।

डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक गुप्ता का कहना है कि हर वर्ग के लोगों को एचआईवी/एड्स फैलने के कारण व बचाव के बारे में जानकारी होनी चाहिए। जागरूकता इस लाइलाज बीमारी को रोकने का एकमात्र विकल्प है। आईसीटीसी सेंटर आकर इस खतरनाक बीमारी के बारे जानकारी लेनी चाहिए। इसके परिणाम राष्‍ट्रमंडल खेलों में गंभीर हो सकते हैं।

ढाई हजार से ज्‍यादा सेक्‍स वर्कर्स

जिले में एचआईवी/एड्स को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है। ऐसे में खेलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की धड़कनें तेज हो गई हैं। विभाग का मानना कि राष्‍ट्रमंडल खेलों के दौरान सेक्स वर्कर्स का जाल बढ़ेगा। ऐसे में पीडि़तों की संख्या में इजाफा होने की आशंका है। इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने अपने स्तर पर विकल्प तलाश लिया है। रेडक्रॉस की ओर से टारगेट इंटरवेंशन प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है।

इनमें रजिस्टर्ड सेक्स वर्कर्स को इस लाइलाज बीमारी के बचाव के बारे में जानकारी दी जाएगी। गौर करने वाली बात यह है कि फरीदाबाद में करीब ढाई हजार सेक्स वर्कर्स ही रजिस्टर्ड हैं जबकि इनकी संख्या कागजी आंकड़ो से कहीं अधिक है।

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