ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने हासिल की सुपरसोनिक डाइव (लीड-3)
'ब्रह्मोस एयरोस्पेस' के प्रवक्ता प्रवीण पाठक ने कहा, "मिसाइल का परीक्षण प्रक्षेपण सुबह 11.35 बजे किया गया। मिसाइल ने बड़े कौशल के साथ और सीधी डाइव लगाते हुए निर्धारित जटिल प्रक्षेप पथ में उड़ान भरी। दुनिया में यह पहला मौका है, जब किसी सुपरसोनिक मिसाइल द्वारा सुपरसोनिक डाइव को साकार किया गया है।"
पाठक ने कहा कि सशस्त्र बलों के प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह पूरी तरह से सटीक उड़ान थी।
बालासोर जिले के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण क्षेत्र से इस मिसाइल को दागा गया। यह मिसाइल 200 से 300 किलोग्राम भार वाले परंपरागत मुखास्त्रों को वहन करने में सक्षम है।
परीक्षण क्षेत्र के निदेशक एस.पी. डैश ने आईएएनएस को बताया, "यह प्रक्षेपण मिशन की सभी जरूरतों के अनुकूल रहा। प्रक्षेपण सौ फीसदी सफल रहा।"
भारत और रूस ने संयुक्त रूप से इस मिसाइल को डिजाइन किया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोसक्वा नदी के नाम पर रखा गया है।
रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने इस परियोजना से जुड़े सुरक्षा बलों और रक्षा वैज्ञानिकों को बधाई दी है। परीक्षण के मौके पर सेना में तोपखाना इकाई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विनोद नयनार और ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.एस. पिल्लै मौजूद थे।
परीक्षण के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की ब्रह्मोस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकऔर सेना की विभिन्न इकाइयों के अधिकारियों सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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