बंजर भूमि कम होने के कारणों का पता लगाएगी सरकार
प्रशांत सूद
नई दिल्ली, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। देश में बंजर भूमि का क्षेत्रफल तेजी से घट रहा है। सरकार ने भूमिक्षेत्र में इस परिवर्तन के कारणों का पता लगाने के लिए एक परियोजना शुरू की है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) ने राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केंद्र (एनआरएससी) के सहयोग से बंजर भूमि क्षेत्र में लगातार कमी के कारणों का पता लगाने के लिए उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करेगा।
अधिकारियों ने कहा कि एनआरएससी यह अध्ययन इस साल के अंत तक पूरा कर लेगा। इस अध्ययन से पता चल सकेगा कि देश में बंजर भूमि में यह कमी किन कारणों से आई है।
वर्ष 1986 से 2000 के बीच पांच चरणों में चलाई गई परियोजना के जरिए देश में 6.38 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन आकलित की गई थी। वर्ष 2003 में किए गए आकलन के मुताबिक देश में बंजर जमीन घटकर 82 लाख हेक्टेयर कम हो गई।
इसके बाद वर्ष 2005-06 में उपग्रह मैपिंग के जरिए तैयार की गई रिपोर्ट में बंजर जमीन 84 लाख हेक्टेयर और घटकर 4.72 करोड़ हेक्टेयर रह गई।
डीओएलआर अधिकारियों ने कहा कि बंजर जमीन के क्षेत्रफल में इस कमी का मुख्य कारण यह है कि हमारे पास तीनों मौसमों में जमीन के उपजाऊपन के तुलनात्मक आंकड़े मौजूद नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "जमीन का कोई टुकड़ा जो गर्मियों में अनुपजाऊ दिखता है मानसून के समय वह हरा दिखाई देता है। ठंड के मौसम में इसी जमीन का रंग अलग दिखाई देता है। जमीन के उपयोग का अनुमान लगाने के लिए हमें तीनों मौसमों के चित्रों का अध्ययन करना होगा।"
अधिकारियों ने कहा, "मकानों, उद्योगों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए जमीन की मांग बढ़ रही है। इस कारण यह पता लगाना जरूरी है कि कहां बंजर जमीन उपलब्ध है और किन कारणों से घट रही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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