एक खुराक से मिलेगी मलेरिया से निजात
शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल यह दवा शोध के दायरे में है लेकिन इसके परिणाम उत्साहजनक हैं। इसे जिस मलेरियाग्रस्त चूहों पर आजमाया जा रहा है, उन पर अब इस बीमारी का कोई असर नहीं दिख रहा है।
गोली रूपी इस दवा को एनआईटीडी609 नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह गोली दो तरह के मलेरिया संबंधी परजीवियों पर असरकारी रहेगी। इसमें प्लाजमोडियम फेलीपॉरम और पी. विवाक्स नाम के परजीवियों से लड़ने की क्षमता है।
इस दवा को मनुष्यों के लिए जारी करने से पहले इसे लेकर सुरक्षा संबंधी कई अन्य परीक्षण किए जाने हैं। इस संबंध में प्रयोगशाला में इस वर्ष के अंत तक परीक्षण शुरू हो जाएंगे।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस दवा में 12,000 रसायनों का मिश्रण है। इसे बनाने में उच्चस्तरीय रोबोटिक स्क्रीनिंग तकनीक का उपयोग किया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक मलेरिया से विश्व में प्रति वर्ष 863,000 लोगों की जान चली जाती है। दुनिया भर में हर वर्ष मलेलिया के लगभग 24.3 करोड़ मामले सामने आते हैं।
मलेरिया मुख्य रूप से मच्छरों के काटने से होता है। इसके कारण बुखार, मांसपेशियों में दर्द और दस्त की शिकायत होती है। सही समय पर इलाज नही होने पर इससे पीड़ित व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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