सरकारी उपेक्षा से सलवा जुडूम नेताओं को नक्सलियों से खतरा

सुजीत कुमार

रायपुर, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। नक्सली विरोधी संगठन सलवा जुडूम के नेताओं के नेताओं का कहना है कि नक्सली सुनियोजित ढंग से उनको निशाना बना रहे हैं। एक समय संगठन को हथियारबंद करने के आरोप का सामना करने वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अब उनकी उपेक्षा शुरू कर दी है।

सलवा जुडूम वर्ष 2005 में बना और सरकारी संरक्षण में तेजी से बढ़ा। उस पर बस्तर क्षेत्र में हिंसा को बढ़ाने और हजारों जनजातीय लोगों को सताने का आरोप लगा। पिछले दो वर्षो से यह संगठन करीब-करीब निष्क्रिय हो गया है।

अब तो पुलिस भी इस बात की पुष्टि कर रही है कि सलवा जुडूम के नेताओं की हत्याएं हो रही हैं।

सलवा जुडूम को शुरू करने के जिम्मेदार माने जाने वाले बस्तर के पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने कहा कि नक्सलियों ने जुडूम के नेताओं की हत्या के लिए एक अलग इकाई गठित की है और इस प्रयास में उनको लगातार सफलता मिल रही है।

कर्मा ने आईएएनएस से कहा, "पिछले दो वर्षो में जुडूम के करीब 200 नेता मारे जा चुके हैं और करीब 400 लोग मौत के खतरे का सामना कर रहे हैं।"

बीजापुर के एक महत्वपूर्ण जुडूम नेता रघु सिंह की नक्सलियों ने 22 जुलाई को हत्या कर दी। दंतेवाड़ा जिले में कांग्रेस के एक अन्य नेता अवधेश सिंह गौतम के आवास पर आठ जुलाई को नक्सलियों ने हमला किया। गौतम की जान बच गई लेकिन हमले में उनका बेटा और दो अन्य लोग मारे गए।

सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ बस्तर क्षेत्र में सलवा जुडूम के तहत नागरिकों को योजनाबद्ध ढंग से हथियारबंद किया था। अधिकारियों ने इसे नक्सलियों के खिलाफ जनता की स्वाभाविक बगावत करार दिया था।

कर्मा नक्सलियों की हिटलिस्ट में सबसे ऊपर हैं और उन पर कई हमले हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आंदोलन से पूरी तरह दूरी बना ली है। इसके कारण नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ा जन प्रतिरोध बिखर गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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