भारत से बयान रिकॉर्ड करने की अनुमति मांगी

हफ़ीज़ चाचड़
बीबीसी हिंदी संवाददाता, पाकिस्तान से
पाकिस्तान गृहमंत्री ने भारत से इजाज़त मांगी है कि पाकिस्तानी अधिकारियों को गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के लिए भारत जाने दिया जाए.
गृहमंत्री रहमान मलिक ने बताया कि उन्होंने इस बारे में अपने भारतीय समकक्ष पी चिदंबरंम से टेलीफो़न पर बात की है और इसके लिए एक आयोग के गठन का प्रस्ताव भी दिया है.
उन्होंने इस्लामाबाद में भारत के उच्चायुक्त शहर सभरवाल से मुलाक़ात की और पाकिस्तान में चल रहे मुंबई हमलों के मुक़मदे की विस्तार से जानकारी दी.
उन्होंने भारतीय अधिकारी को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ नेता ज़की-उर-रहमान लखवी और उन के साथियों के ख़िलाफ़ रावलपिंडी की एक आतंकवाद निरोधक अदालत में सही तौर पर मुक़दमा चल रहा है. लेकिन वो मुक़दमा भारतीय गवाहों के बयान नहीं मिल पाने के कारण रुका हुआ है.
पाकिस्तानी गृहमंत्री ने कहा, "भारत ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बयान रिकॉर्ड करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन पाकिस्तान के संविधान में इस प्रकार के विकल्प की अनुमति नहीं है."
उन्होंने मुलाक़ात के बाद पत्रकारों को बताया कि भारतीय अधिकारियों के बयान रिकॉर्ड करने के लिए पाकिस्तान ने अपने अधिकारियों को भारत जाने का प्रस्ताव दिया. इस संबंध में एक आयोग गठित करने को भी कहा गया है.
रहमान मलिक ने बताया कि मुबंई हमलों के मुक़दमे को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी है कि पाकिस्तानी अधिकारियों को भारत जाने की अनुमति दी जाए ताकि वो अजमल आमिर कसाब का बयान रिकॉर्ड करने वाले जज का बयान रिकॉर्ड कर सकें.
भारत की ओर से पाकिस्तन बाढ़ पीढ़ितों के लिए मिल रही सहायता पर बात करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने भारतीय साहायता को स्वीकार कर बढ़िया काम किया है.
उन्होंने कहा कि अगर भारत ने अच्छा संकेत दिया है तो पाकिस्तान को इससे इंकार नहीं करना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि भारत ने पाकिस्तान के बाढ़ पीढ़ितों के लिए 2 करोड़ 50 लाख की वित्तीय साहायता की घोषणा की है.












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