शिक्षकों की कमी से सार्वभौमिक शिक्षा में बाधा (शिक्षक दिवस 5 सितंबर पर विशेष)
नई दिल्ली, 4 सितम्बर (आईएएनएस)। देशभर में रविवार को शिक्षक दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर शायद सरकार को यह याद आ जाए कि विद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षकों की भारी कमी के चलते सभी को शिक्षा देने का उदेश्य पूरा नहीं किया जा सकेगा।
शिक्षकों की भारी कमी शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसकी वजह से प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की नीति की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
अगर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें तो प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में 12 लाख शिक्षकों की कमी है। इसमें सर्व शिक्षा अभियान के तहत शिक्षकों के 178,000 पदों की मंजूरी भी शामिल है।
इसी तरह प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और इसी स्तर के अन्य शिक्षण संस्थानों में एक तिहाई शिक्षकों की जगह खाली पड़ी हुई हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "शिक्षा का अधिकार के लिए शिक्षक ही महत्वपूर्ण हैं। हमारे पास प्रशिक्षित शिक्षकों का भारी अभाव है जिस वजह से आरटीई कानून को पूरी तरह से लागू नहीं कर पा रहे हैं। हमारे लिए यह एक बड़ी चुनौती है।"
गौरतलब है कि 14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा वाला कानून यानी आरटीई अधिनियम पिछले साल पारित हुआ था। इस कानून के बन जाने के बाद छह से 14 साल के बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की है। शिक्षकों और छात्रों के बीच का अनुपात एक और 30 का होना चाहिए।
इस हकीकत से उलट, अधिकारी ने कहा, "भारत छात्र और शिक्षकों के अनुपात के मामले में सबसे नीचे है। यहां 42 छात्रों पर एक शिक्षक है। लेकिन राज्य सरकारें बेहतर शिक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और इसकी निगरानी केंद्र सरकार कर रही है। ऐसे में यह एक नायाब लक्ष्य नहीं होना चाहिए।"
उन्होंने शिक्षकोंे की गुणवत्ता को लेकर चिंता जाहिर की। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री कपिल सिब्बल खुद भी कह चुके हैं कि शिक्षकों को बेहतर सुविधा मुहैया कराए बिना जमीनी हकीकत में बदलाव नहीं लाया जा सकता है।
अधिकारी ने कहा, "यह सच है कि शिक्षण के क्षेत्र में बेहतर उम्मीदवार नहीं आ रहे हैं। यहां तक कि एचआरडी मंत्री सिब्बल भी इस बात को कई बार कह चुके हैं। मंत्रालय ने 60,000 से अधिक शिक्षकों के लिए आवास और बीमा योजनाओं को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन इसमें थोड़ा वक्त लेगेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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