गठबंधन सेना होगी वापस, तालिबान का हौसला बढ़ा
समाचार पत्र 'डेली टेलीग्राफ' ने शुक्रवार को खबर दी है कि जनरल जैक कीन ने विदेशी नीति संबंधी एक थिंक टैंक की उस रिपोर्ट का समर्थन किया है, जिसमें कहा गया है कि अफगानिस्तान से पश्चिमी देशों की वापसी संबंधी बातचीत से अफगानिस्तानी तालिबान का हौसला बुलंद हुआ है।
रिपोर्ट में सैन्य वापसी के लिए समय सीमा की राजनीतिक बयानबाजी पर हमला किया गया है।
रिपोर्ट के लेखक, आतंकवाद निरोधी विशेषज्ञ, जार्ज ग्रांट ने लिखा, "इससे तालिबान का लड़ाई जारी रखने का हौसला बुलंद हुअा है, क्योंकि उन्हें जिंदा रहने का एक लक्ष्य प्राप्त हो गया है।" रिपोर्ट में लिखा गया है कि सेना की जल्द वापसी, अफगानी जनता के साथ एक बड़ा धोखा होगा।
ब्रिटेन स्थित हेनरी जैक्शन सोसायटी द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट ने इस बात के प्रति सजग किया है कि अफगानी लोग अब काबुल की सरकार को समर्थन देने को लेकर डरे हुए हैं, क्योंकि पश्चिमी सैनिकों के चले जाने के बाद तालिबान द्वारा उन्हें पश्चिमी सैनिकों का सहयोगी करार दे दिए जाने का डर है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया, "मनमाने तरीके से सैन्य वापसी की तारीख तय करने से अफगानी लोग यह महसूस करेंगे कि सरकारी पक्ष का समार्थन करने से अब गठबंधन सेना की वापसी के बाद तालिबान के हाथों प्रतिकार को आमंत्रित करना होगा।"
अफगानिस्तान में नए अमेरिकी कमांडर जनरल, डेविड पीट्रियस के करीबी मित्र, जनरल कीन ने कहा है कि यह रिपोर्ट 'अनोखी और अमूल्य' है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में जारी हुई है, जब कुछ ही दिन बाद संसद में अफगान युद्ध पर एक महत्वपूर्ण बहस होने वाली है। रिपोर्ट में लिखा, "गठबंधन बलों की सरकारें, जो सबसे बुरा विकल्प चुन सकती थीं, वह यह कि वे अफगानिस्तान से बिना शर्त वापसी का संकल्प लेती और वह भी इस बारे में बिना सोचे-विचारे कि वर्तमान रणनीति व्यावहारिक और आवश्यक, दोनों है।"
ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने 2015 के पहले तक ब्रिटिश बलों की वापसी का संकल्प लिया है। जनरल स्टाफ के पूर्व प्रमुख जनरल, सर माइक जैक्शन, कैमरन के इस निर्णय की पहले ही आलोचना कर चुके हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के उस बयान को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि अगले वर्ष जुलाई महीने से सैनिकों की वापसी शुरू हो जानी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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