कनाडा में गुरुद्वारा चुनाव पर न्यायालय की रोक

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के वेंकूवर और उसके आसपास के इलाके को 1890 के दशक में सबसे पहले कनाडा पहुंचे सिख प्रवासियों ने अपना ठिकाना बनाया। यह इलाका कनाडा में सिख समुदाय के सबसे बड़े हिस्से का आवास है।

ऐतिहासिक रॉस स्ट्रीट गुरुद्वारे की स्थापना वर्ष 1908 में हुई थी। समूहों या परिवारों के स्वामित्व वाले अन्य गुरुद्वारों के विपरीत यह वेंकूवर के तीन सार्वजनिक गुरुद्वारों में से एक है जहां चुनाव नियमित तौर पर होते हैं।

अगला चुनाव नवंबर में होना है। परंतु सिख यूथ वेंकूवर की एक याचिका पर प्रांतीय सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव पर रोक लगा दी। याचिका में आरोप लगाया गया कि उदारवादी खालसा दीवान सोसायटी से नियंत्रित वर्तमान प्रबंधन ने मतदाता सूचियों में अनियमितता की है।

अपने आदेश में न्यायाधीश पॉल वाल्कर ने कहा कि मतदाता सूचियों को तैयार करने और चुनाव करवाने के लिए एक तटस्थ व्यक्ति को नियुक्त किया जाना चाहिए।

अपना नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक प्रमुख सिख नेता ने आईएएनएस से कहा कि वेंकूवर के लोवर मेनलैंड और उसके उपनगर में स्थित अन्य दो सार्वजनिक गुरुद्वारों के प्रबंधन पर नियंत्रण हासिल करने के बाद अब कट्टर सिख युवा इस गुरुद्वारे पर भी अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं।

गुरुद्वारे के पूर्व अध्यक्ष जरनैल सिंह भंडल ने कहा, "न्यायालय ने हमारा पक्ष नहीं सुना। यह सही न्याय नहीं है। हम इसे चुनौती देंगे।"

उन्होंने कहा कि सिख यूथ वेंकूवर और कुछ नहीं पूर्व खालिस्तानी कट्टरवादियों का समूह है जो अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए गुरुद्वारे पर कब्जा करना चाहता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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