शिशु के हाव-भावों से नहीं बताते सेहत का हाल
इस नए अध्ययन के मुताबिक यदि किसी शिशु को इंजेक्शन लगाने या खून की जांच से पहले एक चम्मच चीनी खिला दी जाए तो उसके दर्द में जरा भी कमी हुए बिना उसके चेहरे के हाव-भाव बदल जाते हैं। गौरतलब है कि शिशुओं का दर्द दूर करने के लिए उन्हें दशकों से चीनी खिलाई जाती रही है।
वेबसाइट 'इंडिपेंडेंट डॉट को डॉट यूके' के मुताबिक 50 के दशक तक चिकित्सक यह मानते थे कि शिशुओं को दर्द की शिकायत नहीं होती क्योंकि उस समय उनकी चेतना का पर्याप्त विकास नहीं होता। उस समय दर्द के कारण शिशुओं के रोने, चीखने-चिल्लाने को एक सामान्य क्रिया समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता था। इसी तरह शल्य चिकित्सा के दौरान शिशुओं को सुलाने के लिए उन्हें एनेस्थीसिया तो दिया जाता था लेकिन उनके दर्द को कम करने के लिए बच्चों और व्यस्कों की तरह उन्हें दर्दनिवारक नहीं दिए जाते थे।
लंदन के 'युनीवर्सिटी कॉलेज हॉस्पिटल' के अध्ययनकर्ताओं ने अपने शोध में पाया है कि खून की जांच के लिए शिशुओं से रक्त लिए जाने के दौरान उनके न रोने पर भी उनके मस्तिष्क में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं जो बताते हैं कि उन्होंने दर्द महसूस किया।
अध्ययकर्ता जूडिथ मीक का कहना है कि चीनी खिलाने या चीनी का घोल देने पर शिशुओं के रोना बंद कर देने का मतलब यह नहीं है कि उनका दर्द समाप्त हो गया बल्कि वे दर्द होने के बावजूद उससे अपना ध्यान हटाने के लिए उसका स्वाद लेने लगते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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