चीन से तनाव के बीच भारत जापान से आर्थिक समझौता करेगा
नई दिल्ली, 4 सितम्बर (आईएएनएस)। चीन के साथ संबंधों में मतभेद बीच भारत जापान के साथ आर्थिक और सामरिक संबंधों के विस्तार पर विचार कर रहा है।
अक्टूबर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रस्तावित जापान यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण आर्थिक समझौते के लिए अंतिम दौर की वार्ता होगी।
वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर के मंगलवार को टोक्यो पहुंचने की संभावना है। यहां वह व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईपीए) पर जापान के साथ अंतिम दौर की बातचीत करेंगे।
जापान में आर्थिक सहयोग समझौते (ईपीए) के नाम से जाने जा रहे इस समझौते के जरिए इस्पात, परिधान, औषधियों और मशीनरी सहित करीब 9,000 उत्पादों पर शुल्क कम किए जाएंगे। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी। वर्ष 2008-09 में दोनों देशों के बीच 11 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जापानी प्रधानमंत्री नाओतो कान के साथ 25-27 अक्टूबर को संभावित वार्षिक बैठक से पहले दोनों देश इस समझौते पर अंतिम सहमति बनाना चाहते हैं।
मनमोहन सिंह की जापान यात्रा पर चीन की भी नजर रहेगी। जापान दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और चीन का प्रतिस्पर्धी है।
चीन ने इससे पहले परमाणु समझौते पर भारत-जापान वार्ता को गंभीरता से लिया है। जापान ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों से परमाणु व्यापार न करने की अपनी परंपरा को तोड़ते हुए इस समझौते पर बातचीत शुरू की है।
भारत की संप्रभुता से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में चीन ने बेहद आक्रामकता दिखाई है। चीन ने भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी को इस आधार पर वीजा देने से इंकार किया कि वह जम्मू एवं कश्मीर के क्षेत्राधिकार वाली उत्तरी कमान का नेतृत्व कर रहे हैं।
विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा और जापानी विदेश मंत्री कात्सुया ओकाडा के बीच 15 दिन पहले हुई बातचीत में भी चीनी खतरे पर चिंता सामने आई थी। सूत्रों के मुताबिक बातचीत के दौरान जापानी विदेश मंत्री ने चीन के सैन्य खर्चो में पारदर्शिता न होने को रेखांकित करते हुए पारदर्शिता लाए जाने की जरूरत बताई थी। भारत ने भी इस संबंध में अपनी बेचैनी व्यक्त की थी।
इसके अलावा पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में 11,000 चीनी सैनिकों की मौजूदगी की खबरों से भारत में चिंता है। भारत इस मामले में चीन को अपनी चिंताओं से अवगत करा चुका है।
इस घटना के कारण भारत अब अपनी 'लुक ईस्ट' (पूर्व की ओर देखो) नीति को और मजबूती से लागू करने के लिए प्रेरित हुआ है। भारत स्वयं को पूर्वी एशिया के देशों के लिए एक लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर सकता है। अक्टूबर के अंत में पूर्वी एशिया क्षेत्र के देशों की बैठक आयोजित होनी है।
चीन के साथ जापान के हालांकि स्वतंत्र रिश्ते हैं लेकिन मौजूदा घटनाक्रम के चलते भारत और जापान अब अपने संबंधों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
दो महीने पहले भारत और जापान ने अपने संबंधों को मजबूती देते हुए संयुक्त राष्ट्र में सुधार और पायरेसी के खिलाफ प्रयास जैसे कई मुद्दों पर व्यापक बातचीत की थी।
अफ्रीका में चीन के बढ़ते दखल को देखते हुए पिछले महीने अपने भारत दौरे में जापानी विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार के मुद्दे पर अफ्रीकी देशों से बातचीत शुरू करने के लिए भारत के सहयोग की मांग की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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