इस साल 130 तेंदुओं का शिकार हुआ
नई दिल्ली, 4 सितम्बर (आईएएनएस)। पर्यटकों के लिए चहलकदमी करते तेंदुए देखना कभी न भूलने वाला अहसास होता है लेकिन इन प्राणियों का जीवन अब खतरे में है। इस साल देश में करीब 130 तेंदुओं का शिकार हुआ। विशेषज्ञों ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है।
स्वयंसेवी संगठन भारतीय वन्यजीव संरक्षण सोसायटी (डब्ल्यूपीएसआई) के मुताबिक तेंदुओं की सबसे ज्यादा मौतें उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में दर्ज की गई हैं। इस साल कुल 240 तेंदुओं की मौत दर्ज की गई है।
डब्ल्यूपीएसआई के मुताबिक पूरे देश में मानव-पशु संघर्ष में 17, सड़क दुर्घटना में 19, वन विभाग द्वारा गोली मारने से आठ और राहत कार्यो के दौरान छह तेंदुओं की मौत हुई है। इसके अलावा दो तेंदुओं को अन्य बड़े जानवरों ने मार दिया। जबकि बाकी 58 तेंदुए मरे हुए पाए गए।
इनके अलावा बाकी 130 तेदुओं को शिकार के जरिए मारे जाने की आशंका है।
उत्तराखण्ड में तेंदुओं की मौतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यहां 29 तेंदुओं का शिकार किया गया है और चार मानव-पशु संघर्ष में मारे गए हैं। यहां 15 तेंदुओं की खाल और हड्डियां जब्त हुई हैं।
डब्ल्यूपीएसआई के टीटो जोसेफ ने कहा, "इसके अलावा 31 अन्य तेंदुए यहां मरे हैं कुछ प्राकृतिक आपदाओं में लेकिन बाकी संघर्षो में मरे हैं, हमारे पास इसके सबूत नही हैं।"
वर्ष 2007 में हुई गणना के समय प्रदेश में 2,300 तेंदुए थे।
उत्तराखण्ड के मुख्य वन संरक्षक परमजीत सिंह ने आईएएनएस से कहा, "इस साल हम बाघों की गणना की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं इससे तेंदुओं की संख्या का भी खुलासा होगा।"
महाराष्ट्र से 15 तेंदुओं का अवैध शिकार हुआ है। उत्तर प्रदेश से 13 और कर्नाटक से 12 तेंदुओं का अवैध शिकार हुआ।
वर्ष 2009 में भी तेंदुओं की तस्करी के 160 मामले सामने आए थे और बड़ी संख्या में तेंदुओं की खाल और शरीर के अन्य हिस्से जब्त हुए थे।
स्वयंसेवी संगठन के मुताबिक वर्ष 2008 में 157 तेंदुओं का अवैध शिकार हुआ था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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