घाघरा की बाढ़ में अब भी फंसे हैं हजारों
सबसे ज्यादा तबाही प्रदेश के बाराबंकी, गोंडा, बहराइच और लखीमपुर खीरी जिलों में हुई है। इन जिलों में निचले इलाकों के करीब 300 गांव डूब गए हैं।
गोंडा में करीब 100 गांवों के दो लाख से ज्यादा लोग और सैकड़ों एकड़ खरीफ की फसल घाघरा की बाढ़ से प्रभावित हुई है। गोंडा के जिलाधिकारी मधुकर द्विवेदी ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जिले में 61 राहत शिविर बनाए गए हैं। प्रभावित गांवों में अब भी 50 हजार से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
बहराइच जिले में कैसरगंज और महसी तहसीलों में घाघरा नदी के उफान पर आने से करीब 125 गांवों के 200 लोग बेघर हो गए हैं।
बहराइच के जिलाधिकारी रिग्जियान सैंफिल ने संवाददाताओं को बताया कि करीब एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को मोटर बोट और नावों से ऊंचाई वाले स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
बाराबंकी में एल्गिन-चरसरी तटबंध टूटने से हजारों ग्रामीण प्रभावित हुए हैं। जिले के अपर जिलाधिकारी (वित्त) देवेंद्र पांडे ने संवाददाताओं को बताया कि घाघरा का जलस्तर पहले की तुलना में घटा है। प्रभावित इलाकों में प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) के जवान नावों और मोटर बोट के जरिए राहत व बचाव कार्य में जुटे हैं।
लखीमपुर खीरी में निघासन और पलिया में करीब 50 हजार बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षति स्थानों पर पहुंचाया गया है।
इस बीच राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के अधिकांश इलाकों में लगातार तेज और मध्यम बारिश का दौर जारी है। उत्तराखण्ड स्थित बनबसा बैराज से काफी पानी छोड़े जाने और नेपाली नदियों का जलस्तर बढ़ने से घाघरा और शारदा नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लखीमपुर खीरी, बहराइच, बाराबंकी और गोंडा जिलों में अब तक कुल 11 मौतें हुई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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