जब शिक्षक बन जाते हैं छात्र (शिक्षक दिवस पर विशेष)
नई दिल्ली, 4 सितम्बर (आईएएनएस)। साल में एक दिन ऐसा भी आता है जब छात्र शिक्षक बन जाते हैं और शिक्षक छात्र बनकर अपने शिष्यों की बातों को ध्यान से सुनते हैं। इस तरह वे अपने उन दिनों की स्मृतियों को ताजा करते हैं जब वे स्वयं छात्र हुआ करते थे। जी हां, शिक्षक दिवस यानी पांच सितंबर को शिक्षकों को ऐसे ही रोचक अनुभवों से दो-चार होने का अवसर मिलता है।
छात्रों के लिए भी शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने का यह सुनहरा मौका होता है। छात्र शिक्षकों को उपहार भेंट करते हैं, ग्रीटिंग कार्ड के जरिए बधाई संदेश देते हैं और उनके सम्मान में कविताएं और गीत सुनाते हैं।
शिक्षक दिवस यों तो पूरे विश्व में मनाया जाता है लेकिन अलग-अलग तिथियों को। भारत में यह दिवस पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस 5 सितम्बर को मनाया जाता है। देश में शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा तब शुरू हुई जब डा. राधाकृष्णन 1962 में राष्ट्रपति बने और उनके छात्रों एवं मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की उनसे अनुमति मांगी।
स्वयं प्रतिष्ठित शिक्षक रह चुके डा. राधाकृष्णन ने कहा, "अनुमति तभी दी जाएगी, जब मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय देशभर के शिक्षकों का दिवस आयोजित करें।" इसके बाद से प्रत्येक वर्ष 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा।
डा. राधाकृष्णन का जन्म पांच सितंबर, 1888 को मद्रास (चेन्नई) के तिरुत्तानी कस्बे में हुआ था। उनके पिता वीरा समय्या एक जमींदारी में तहसीलदार थे। उनका बचपन एवं किशोरावस्था तिरुत्तानी और तिरुपति (आंध्र प्रदेश) में बीता। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से एम.ए. की पढ़ाई पूरी की तथा 'वेदांत के नीति-शास्त्र' पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया।
मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग में 1909 में वह व्याख्याता नियुक्त किए गए। फिर 1918 में मैसूर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने। लंदन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में वह 1936 से 39 तक पूर्व देशीय धर्म एवं नीतिशास्त्र के प्रोफेसर रहे। डा. राधाकृष्ण 1939 से 48 तक बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे।
वर्ष 1946 से 52 तक उन्हें यूनेस्को के प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व का अवसर मिला। वह रूस में 1949 से 52 तक भारत के राजदूत रहे। 1952 में ही उन्हें भारत का उपराष्ट्रपति चुना गया। मई, 1962 से मई, 1967 तक उन्होंने राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया। डा. राधाकृष्णन ने कहा था, "शिक्षकों को देश का मार्गदर्शक होना चाहिए।"
शिक्षक दिवस देशभर के शिक्षकों के लिए गर्व का दिन होता है। इस दिन छात्र अपने गुरुओं के मनोरंजन के लिए नृत्य एवं नाटक प्रस्तुत करते हैं। कहीं-कहीं छात्र शिक्षकों की वेशभूषा में अपने स्कूल या कॉलेज जाते हैं और अध्यापक की भूमिका अदा करते हैं। इससे शिक्षकों का मनोरंजन तो होता ही है, वे अतीत के सुनहरे पलों में खो जाते हैं।
दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित आंध्रा एजुकेशन सोसाइटी की शिक्षिका कीर्ति उमापति कहती हैं, "शिक्षक दिवस सचमुच हमारे लिए गौरव का दिन होता है। बच्चे हमें फूल, ग्रीटिंग कार्ड, कलम या कोई उपयोगी किताब भेंट करते हैं। अपने प्रति बच्चों का सम्मान-भाव देख उनके प्रति हमारा स्नेह उमड़ पड़ता है।"
दिल्ली के शकरपुर स्थित लिटिल पर्ल स्कूल की शिक्षिक प्रवेश प्रांजल कहती हैं, "शिक्षकों में अहंकार, अत्याचार, ईष्र्या और द्वेष का भाव नहीं होना चाहिए। हमें बच्चों का अच्छा दोस्त बनकर उन्हें सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। लेकिन जब किसी शिक्षक द्वारा छात्र या छात्रा की बेरहमी से पिटाई की खबर सुनती हूं तो बहुत दुख होता है।"
शिक्षक दिवस अलग-अलग देशों में अलग-अलग तिथि को मनाया जाता है। पड़ोसी देश पाकिस्तान में 5 अक्टूबर, चीन में 10 सितम्बर, चेक गणराज्य में 28 मार्च, हांगकांग में 12 सितम्बर, ऑस्ट्रेलिया में अक्टूबर के अंतिम शुक्रवार को, ब्राजील में 15 अक्टूबर और अर्जेन्टीना में 11 सितम्बर को इसे मनाया जाता है।
इसी तरह संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 मई, वियतनाम में 20 नवंबर, फिलीपींस में 5 अक्टूबर, चिली में 16 अक्टूबर, इंडोनेशिया में 25 नवंबर, ईरान में 2 मई, हंगरी में जून के पहले शनिवार को, मेक्सिको में 15 मई, थाइलैंड में 16 जनवरी एवं दुनिया के अधिकांश देशों में 5 अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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