सांसदों की वेतन वृद्धि को लोकसभा की मंजूरी
नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। सांसदों के वेतन में तीन गुना और भत्तों में दोगुना वृद्धि करने के लिए पेश किए गए एक विधेयक को लोकसभा ने शुक्रवार को अपनी मंजूरी दे दी।
इस विधेयक को ऐसे समय में मंजूरी दी गई है, जब मीडिया और जनता ने वेतन वृद्धि के इस तरीके की आलोचना की है और सांसदों की परिलब्धियों के निर्धारण के लिए एक स्वतंत्र आयोग गठित किए जाने का सुझाव दिया है।
बहरहाल, इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विधेयक के अनुसार सांसदों का वेतन अब 16,000 रुपये से बढ़ा कर 50,000 रुपये और संसद सत्र में हिस्सा लेने तथा संसदीय समितियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दैनिक भत्ते को 1,000 रुपये से बढ़ा कर 2,000 रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा संसदीय क्षेत्र के लिए निर्धारित 20,000 रुपये प्रति महीने के भत्ते को तथा कार्यालयी खर्च संबंधी भत्ते को भी अलग-अलग बढ़ा कर 45,000 रुपये कर दिया गया है।
विधेयक के अनुसार सांसदों का यात्रा भत्ता अब एक लाख रुपये से बढ़ा कर चार लाख रुपये कर दिया गया है।
सांसद वेतन-भत्ता अधिनियम-1954 में संशोधन करने वाले इस विधेयक को अब राज्यसभा में पारित किया जाना है। उसके बाद यह बढ़ोतरी लागू हो जाएगी। विधेयक में पूर्व सांसदों का पेंशन भी 8,000 रुपये से बढ़ा कर 20,000 रुपये कर दिया गया है।
यह बढ़ोतरी मौजूदा लोकसभा के प्रारंभ से लागू होगी। यानी सांसदों को मई 2009 से बकाए का भुगतान प्राप्त होगा।
संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल ने विधेयक को संसद में पेश किया।
कुछ सांसदों ने मीडिया और जनता की आलोचना के मद्देनजर सुझाव दिया कि कोई ऐसा प्रावधान किया जाए कि जब सांसद सदन की कार्यवाही स्थगित करने को बाध्य कर दें, तो उनका उस दिन का वेतन काट लिया जाए।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि इस मुद्दे के लिए एक स्वतंत्र प्रक्रिया होनी चाहिए कि वेतन में कितनी बढ़ोतरी की आवश्यकता है।
जनता दल (युनाइटेड) ने आडवाणी के विचार का समर्थन किया और कहा कि भविष्य में इस तरह की कोई प्रक्रिया विकसित की जानी चाहिए।
बंसल ने कहा, "सांसदों के साथ व्यापक चर्चा के बाद इस तरह की कोई प्रक्रिया स्थापित की जाएगी।"
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता लालू प्रसाद ने एक विरोधाभासी विचार सामने रखा। उन्होंने कहा कि संविधान ने सांसदों को अधिकार दिया है कि वे अपना वेतन खुद से तय करें और हम वही काम कर रहे हैं।
कांग्रेस के संजय निरूपम ने कहा कि वह विधेयक का समर्थन करते हैं, लेकिन संसदों का उस दिन का वेतन काट लिया जाना चाहिए, जिस दिन उनकी वजह से सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ जाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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