विदेशी सहायता को नियंत्रित करने के लिए विधेयक पारित
इस विधेयक को एक सप्ताह पहले राज्यसभा में पारित किया गया था।
विदेशी योगदान (नियमन) विधेयक 2006 को विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम 1976 के स्थान पर लागू किया जाएगा।
गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित इस विधेयक को सदन में भरपूर समर्थन मिला। सदस्यों ने आंतरिक सुरक्षा के बदले हुए परिदृश्य में देश में अवैध धन प्रवाह के मामले पर भी चिंता जताई।
इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद चर्च, मंदिरों, मस्जिदों, ट्रस्टों और धार्मिक संगठनों और राजनीतिक संगठनों को विदेशी दानदाताओं से लिए जाने वाले धन का पूरा हिसाब किताब सरकार को देना पड़ेगा।
लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय माकन ने कहा कि इस विधेयक के जरिए विदेशी मदद से बलपूर्वक धर्मातरण कराने वाले, सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वाले लोगों को दोषी ठहराने में मदद मिलेगी।
मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि इस विधेयक से संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को विदेशी संगठनों से मिलने वाली मदद को सीमित नहीं किया गया है।
इस विधेयक के जरिए सरकार को विदेशी पैसे का हिसाब-किताब नहीं देने वाले संगठनों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार मिलेगा।
माकन ने कहा कि देश में 40,000 से ज्यादा संगठन विदेशी सहायता ग्रहण करते हैं और इनमें से आधे से ज्यादा संगठन इस राशि की जानकारी उपलब्ध नहीं कराते।
उन्होंने कहा, "हम इस पैसे को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानून चाहते हैं।"
इस विधेयक में राजनीतिक संगठनों को विदेशी सहायता लेने पर रोक लगाई गई है और सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी संगठन को राजनीतिक संगठन की सूची में शामिल कर सकती है।
विधेयक में कहा गया है कि केंद्र सरकार किसी भी संगठन को विभिन्न शर्तों के आधार पर विदेशी मदद लेने का प्रमाण पत्र देने से इंकार कर सकती है और उसे रद्द कर सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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