आवारा कुत्तों के सामने लाचार है लखनऊ नगर निगम (पुन: जारी)
लखनऊ, 27 अगस्त (आईएएनएस)। संसाधनों की कमी के कारण आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने में असफल लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) उनके सामने खुद को लाचार महसूस कर रहा है। लखनऊ में कुत्तों के काटने के मामलों में तीन गुना वृद्धि हुई है।
शहर के गोमतीनगर इलाके में स्थित केंद्रीय विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा अंशुमा यादव पर बुधवार को विद्यालय परिसर में खेलते वक्त आठ से 10 आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। कुत्तों ने छात्रा के सिर व पीठ पर काटकर बुरी तरह से जख्मी कर दिया।
गंभीर रूप से घायल अंशुमा का सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। फिलहाल, उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी नगर निगम पर है। राजधानी में वर्तमान समय में आवारा कुत्तों की संख्या 10,000 से अधिक है। इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों को पकड़ने के लिए केवल एक डॉग कैचर है।
एलएमसी के अधिकारी मानते हैं कि आवारा कुत्तों की संख्या और उनके काटने की घटनाओं में दिन-ब-दिन हो रही वृद्धि पर काबू पाना उनके लिए बड़ी चुनौती है।
नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी सुधीर कुमार ने गुरुवार को आईएएनएस से बताया हमारे लिए स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है। हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पूरे लखनऊ में केवल एक डॉग कैचर है।
उन्होंने कहा कि हालांकि एलएमसी में डॉग कैचर का केवल एक ही स्थाई पद है, लेकिन समय-समय पर हमने निजी स्तर पर डॉग कैचरों को किराये पर पर लेने का प्रयास किया है। लेकिन कोई भी इस काम में दिलचस्पी नहीं लेता है। लिहाजा समस्या बनी हुई है। हम फिर भी एलएमसी के डॉग कैचिंग दस्ते में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल करने के प्रयास कर रहे हैं।
लखनऊ में कुत्तों से खतरे का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कुत्ते के काटने के मामलों में करीब तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। शहर के बलरामपुर अस्पताल के रेबीज विरोधी विभाग में वर्ष 2006 में शहर में कुत्तों के काटने के करीब 8,000 मामले सामने आए थे। वर्ष 2007 में ये मामले बढ़कर 14,000 तक पहुंच गए। वर्ष 2008 में इन मामलों की संख्या बढ़कर 22,000 और 2009 में 24,000 तक पहुंच गई।
कर्मचारियों की कमी के अलावा दूसरी समस्याओं के चलते भी आवारा कुत्तों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पर्याप्त जगह न होने से आंवारा कुत्तों का नसबंदी कार्यक्रम बड़े पैमाने पर नहीं चल पा रहा है।
कुमार ने कहा कि अभी हमारे पास समुचित जगह ही नहीं है, जहां पर बड़े पैमाने पर आवारा कुत्तों को रखकर नसबंदी कार्यक्रम चला सकें।
अधिकारियों के मुताबिक एलएमसी एनीमल आश्रम के कर्मचारियों के सहयोग से हर माह 25 से 30 आवारा कुत्तों की नसबंदी करता है। एनीमल आश्रम जानवरों का अस्पताल है, जहां पर नसबंदी ऑपरेशन किए जाते हैं।
लखनऊ के महापौर दिनेश शर्मा मानते हैं कि एक बार कुत्तों का श्वानालय बन जाने के बाद शहर को कुत्तों से मुक्ति मिल जाएगी।
शर्मा ने कहा कि शहर के अमौसी इलाके में लखनऊ नगर निगम की कान्हा उपवन परियोजना अगले कुछ महानों में शुरू हो जाएगी। कान्हा उपवन के श्वानालय में एक समय में करीब 4,000 कुत्तों को रखा जा सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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