जूडा हड़ताल : सरकार व डाक्टर 'जिद' पर कायम, मरीज बेहाल

ज्ञात हो कि प्रदेश के चार चिकित्सा महाविद्यालय- इंदौर, जबलपुर, रीवा एवं ग्वालियर के जूडा 17 अगस्त से 20 सूत्री मांगों को लेकर बेमियादी हड़ताल पर हैं। प्रदेश सरकार ने हड़ताल पर काबू पाने के लिए सख्त रवैया अपनाते हुए 70 से ज्यादा जूनियर डाक्टरों को निलंबित कर दिया है। इसके बावजूद जूडा काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया जूडा से काम पर लौटने की अपील कर चुके हैं। साथ ही चौहान ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी, जो बेअसर रही। चारों चिकित्सा महाविद्यालय के हड़ताली जूडा ने सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए हैं। रविवार को इंदौर, ग्वालियर और सोमवार को जबलपुर एवं रीवा के जूडा ने सामूहिक इस्तीफे दिए।

इस बीच स्वास्थ्य राज्यमंत्री हार्डिया के आश्वासन के बाद काम पर लौट चुके भोपाल के जूडा ने भी हड़ताली जूडा का साथ देने का मन बना लिया है। उन्होंने 25 अगस्त से काली पट्टी बांधकर काम करते हुए प्रदर्शन का एलान किया है।

गौरतलब है कि दो दिन पहले सरकार और हड़ताली जूडा के बीच वार्ता विफल हो जाने के बाद सरकार अब जूनियर डाक्टरों के काम पर लौटने से पहले उनसे बात को तैयार नहीं है। दूसरी ओर जूडा मांगें पूरी होने से पहले काम पर न लौटने का एलान कर चुके हैं। दोनों के बीच खींचतान का खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

सरकार ने हालांकि वैकल्पिक इंतजाम की बात कही है, मगर इंतजार न करते हुए बहुत-से मरीज निजी अस्पतालों की ओर रुख करने लगे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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