ऑस्ट्रेलिया त्रिशंकु संसद की ओर

ऑस्ट्रेलिया में अंतिम बार ऐसी स्थिति 1940 में आई थी जब किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. हांलाकि ये अंतिम नतीजे नहीं बल्कि रुझान हैं. इसीबीच ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी की नेता जूलिया गिलार्ड ने कहा है कि वे 'संघर्ष जारी रखेंगी".
उधर विपक्षी गठबंधन के नेता टोनी एबट ने कहा है कि गिलार्ड की लेबर पार्टी ने अपना बहुमत और वैधता दोनों ही खो दिए हैं. ये चुनाव जूलिया गिलार्ड के केविन रड को लेबर पार्टी के नेतृत्व की दौड़ हराने के दो महीने बाद हुए हैं.
प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने मेलबर्न में अपने समर्थकों के सामने कहा है, “ लोगों ने अपना निर्णय सुना दिया है लेकिन इस जनादेश के मायने जानने में अभी कुछ वक़्त लगेगा. "
उधर गिलार्ड को चुनौती दे रहे विपक्षी गठबंधन के नेता टोनी एबट ने सिडनी में कहा, “ये हमारी उपलब्धियों पर गर्व करने की रात है. ज़ाहिर है मुक़ाबला कांटे का है और सब कुछ साफ़ होने में कई दिन लग सकते हैं."
सिडनी में बीबीसी संवाददाता निक ब्रांयट के अनुसार दो महीने पहले गिलार्ड जब सत्ता में आईं थीं तो उन्हें लगा था कि ऑस्ट्रेलिया की पहली महिला प्रधानमंत्री होने के नाते वो आम चुनाव जीत जाएंगी लेकिन लेबर पार्टी के नेतृत्व से केविन रड को हटाना उनके ख़िलाफ़ गया है. केविन रड के गृह राज्य क्वींसलैंड में तो लेबर पार्टी को काफ़ी नुकसान हुआ है
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक गिलार्ड को चुनौती दे रहे टोनी एबट को छह महीने पहले कोई भी दौड़ में नहीं देख रहा था लेकिन उन्होंने इस चुनाव को एक 'फ़ोटो-फिनिश' में तबदील कर दिया है.












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