असम में बाढ़ से 50,000 विस्थापित
अधिकारियों के मुताबिक अभी तक किसी के जानमाल के नुकसान का समाचार नहीं है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि बह्मपुत्र की सहायक नदी सिंगोरा का जलस्तर बढ़ जाने से बाढ़ का पानी कम से कम 40 गावों में प्रवेश कर गया है। इन गावों के निवासी रेलवे पटरियों और स्टेशनों पर शरण लिए हुए हैं।
जिले के एक अधिकारी ने बताया, "20 से 25 मीटर ऊंचे दो तटबंधों में दरार पड़नें की वजह से नदी का पानी रिहायसी इलाकों में प्रवेश कर गया है।"
अधिकारी के मुताबिक अभी तक बाढ़ की वजह से किसी तरह के जानमाल के नुकसान का समाचार नहीं है। प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और आपदा प्रबंधन की टीम स्थिति पर नजर रखे हुए है। खाद्य पदार्थों के अलावा अन्य आवश्यक वस्तुओं का प्रबंध किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार से धन मिलने के बावजूद तटबंधों की मरम्मत नहीं की गई है, जिससे लोगों के सामने परेशानियां खड़ी हो रही हैं।
स्थानीय निवासी धरनीधर दास ने बताया, "केंद्र सरकार द्वारा तटबंधों के निर्माण और मरम्मत के लिए राशि मुहैया कराई गई है, लेकिन यह राशि अधिकारियों और ठेकेदारों के जेबों में चली गई। तटबंध में दरार पड़ने के परिणाम हमें भुगतने पड़ रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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