मप्र क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद को लेकर सियासत गरमाई
एमपीसीए लगभग साढ़े पांच दशक से प्रदेश में क्रिकेट विकास की गतिविधियों को संचालित करता आ रहा है। इससे पहले इस संगठन का नाम होल्कर व मध्य भारत पर हुआ करता था। इस संगठन की कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्ष का होता है। इसी के चलते हर दो साल बाद होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में नई कार्यकारिणी का चुनाव होता है।
वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल 30 अगस्त को पूरा होने वाला है और उससे पहले एजीएम की बैठक आवश्यक है। एमपीसीए की 22 अगस्त को एजीएम की बैठक होगी और उसी में नई कार्यकारिणी का चुनाव होगा।
ज्योतिरादित्य 2001 के बाद से एमपीसीए के अध्यक्ष हैं। इससे पहले उनके पिता माधवराव सिंधिया एमपीसीए के अध्यक्ष हुआ करते थे। इस बार भी ज्योतिरादित्य को अध्यक्ष पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। इसका कारण यह है कि परंपरा के मुताबिक एमपीसीए के चुनाव निर्विरोध होते रहे हैं।
इस दफा अध्यक्ष पद पर अपरोक्ष रूप से उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा दावा ठोके जाने से एमपीसीए में राजनीतिक रंग नजर आने लगा है। पिछले दिनों विजयवर्गीय ने क्रिकेट जगत से जुड़े लोगों को एक भोज देकर इस माहौल को और गर्मा दिया है। इतना ही नहीं इंदौर में एक पर्चा भी बांटा गया है जिसमें एमपीसीए पर इंदौर की उपेक्षा का आरोप लगाया गया।
एमपीसीए द्वारा ग्वालियर को महत्व देने और इंदौर की उपेक्षा के आरोप को ज्योतिरादित्य ने नकारा है। उन्होंने कहा कि इंदौर में क्रिकेट के विकास की हर संभव कोशिश की गई है। इंदौर में स्टेडियम को राशि दिए जाने के अलावा अधोसंरचना विकास के प्रयास हुए हैं और ट्वेंटी-20 मैच भी इंदौर को मिला है।
एमपीसीए के कुल 245 सदस्य हैं, जिनमें आजीवन सदस्यों की संख्या 204 है। एमपीसीए के रोहित पंडित ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि पिछले अनुभवों के मुताबिक इसी बैठक में विभिन्न पदों के लिए दावेदारों के नाम सामने आते हैं। पदों की संख्या के अनुरूप नाम सामने आने पर चुनाव निर्विरोध संपन्न हो जाता है। पद संख्या से नाम ज्यादा आने की स्थिति में चुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि एमपीसीए में इंदौर के 100 से ज्यादा सदस्य हैं, इसी वजह से विजयवर्गीय का खेमा चुनाव लड़ने का मन बना रहा है। वहीं ज्योतिरादित्य की क्रिकेट जगत में पकड़ और गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित किए जाने के कारण विजयवर्गीय खेमा कुछ संशय में है। यही कारण है कि खुले तौर पर चुनाव लड़ने का एलान विजयवर्गीय खेमे से नहीं किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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