सरकारी जांच समिति का वेदांता परियोजना को अनुमति से इंकार
कालाहांडी जिले के नियामगिरि में खनन कंपनी द्वारा वन अधिकार कानून और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही समिति ने कहा कि इस इलाके में खनन की अनुमति देने से जनजातीय लोगों का भरोसा टूट जाएगा।
राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य एन.सी.सक्सेना की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय समिति ने कहा, "समिति का यह स्पष्ट मत है कि किसी निजी कंपनी (वेदांता) को लाभ पहुंचाने के लिए प्रस्तावित खनन स्थल पर दो आदिम जनजाति समूहों-कुटिया और डोंगरिया कोंध- के अधिकारों को छींन कर प्रस्तावित इलाके में खनन की अनुमति देने से जनजातियों का कानून में भरोसा टूट जाएगा।"
समिति ने कहा है कि चूंकि वेदांता ने बार-बार कानून का उल्लंघन किया है, लिहाजा इसे प्रस्तावित खनन इलाके में जनजातियों के अधिकारों की कीमत पर खनन की फिर अनुमति देने से देश की सुरक्षा और बेहतरी के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
ज्ञात हो कि इन पहाड़ियों पर अपना अधिकार रखने वाले जनजातीय लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और जारी विवाद के कारण वेदांता के कुछ निवेशकों ने परियोजना से अपना शेयर वापस ले लिए हैं।
अब इस परियोजना का भविष्य पर्यावरण मंत्रालय को तय करना है।
पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश ने शनिवार को ही कह दिया था कि सरकार किसी कॉरपोरेट द्वारा वन कानून के किसी भी तरह के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगी और वेदांता परियोजना पर कोई निर्णय समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद लिया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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