कश्मीर हिंसा में 4 की मौत, 47 घायल (राउंडअप)

इस बीच श्रीनगर में एकीकृत मुख्यालय की शुक्रवार की शाम प्रस्तावित बैठक स्थगित कर दी गई। अब यह बैठक शनिवार को होगी।

यद्यपि इस बात की चर्चा रही कि बैठक इसलिए स्थगित की गई, क्योंकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला उत्तर कश्मीर में विरोध प्रदर्शन के दौरान चार नागरिकों की हुई मौत को लेकर नाराज थे। लेकिन राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि बैठक इसलिए स्थगित की गई, क्योंकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अर्धसैनिक बल के अधिकारी क्षेत्र में व्यस्त थे।

बयान में कहा गया है, "एकीकृत मुख्यालय की बैठक शुक्रवार की शाम छह बजे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में होनी थी। लेकिन वरिष्ठ पुलिस एवं अर्धसैन्य बल अधिकारियों के क्षेत्र में व्यस्त रहने के कारण बैठक स्थगित कर दी गई।"

उधर बारामूला जिले के सोपोर कस्बे के बाहरी हिस्से में बोमई गांव में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक शिविर पर उग्र भीड़ ने हमला बोल दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। इस दौरान मोहम्मद आरिफ मीर (19) और सुमीर अहमद लोन (18) की मौत हो गई और दो प्रदर्शकारी घायल हो गए।

बोमई गांव में भीड़ शाम को फिर जुट गई और उसने सीआरपीएफ के शिविर पर फिर हमला किया। सुरक्षा बलों को भीड़ पर फिर गोलीबारी करनी पड़ी।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "इस घटना में एक महिला सहित दो लोगों को गोली लगी है। दोनों को विशेष इलाज के लिए श्रीनगर ले जाया गया है।"

इससे पहले उत्तरी कश्मीर के त्रेहगाम गांव में कर्फ्यू का उल्लंघन कर रही भीड़ पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मुदस्सिर अहमद जरगर (21 वर्ष) और पट्टन शहर में 60 वर्षीय अली मुहम्मद खांडे की मौत हो गई।

पुलिस ने कहा कि इस घटना में दो महिला प्रदर्शनकारी घायल भी हुई हैं। दोनों को एक स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "खांडे की मौत उस समय हुई, जब बारामूला जिले के पट्टन शहर में कर्फ्यू प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने गोली चलाई। इस घटना में एक प्रदर्शनकारी घायल हो गया।"

शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान सौरा (एसकेआईएमएस) के एक चिकित्सक ने यहां बताया कि खांडे को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया और काफी प्रयास के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।

घायल खांडे का उपचार कर रहे चिकित्सक ने कहा, "उनका मस्तिष्क बुरी तरह प्रभावित हो गया था। ऐसा आंसू गैस के सीधे मस्तिष्क में प्रवेश कर जाने या गोली लगने से हुआ होगा।"

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पट्टन शहर में उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठी, आंसू गैस के कनस्तरों का इस्तेमाल किया तथा हवा में गोलियां दागीं।

बारामूला शहर में सीमेंट के पुल पर पथराव कर रहे दो युवकों को सुरक्षा बलों ने खदेड़ा तो वे झेलम नदी में कूद पड़े और तैरकर सुरक्षित निकल गए।

जरगर की मौत उस समय हुई, जब यहां से 120 किलोमीटर दूर उत्तरी कश्मीर के त्रेहगाम गांव में कर्फ्यू का उल्लंघन कर रही एक एक अन्य भीड़ पर सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की।

पुलिस ने बताया कि त्रेहगाम में दो महिला प्रदर्शनकारी भी घायल हो गईं। उनका एक अस्पताल में उपचार किया जा रहा है।

दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग शहर, श्रीनगर शहर के बाहरी कस्बे बेमिया और उत्तरी कश्मीर के पलहलान शहर में भी प्रदर्शन किया गया तथा पथराव कर रही भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष हुई।

मीवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले अलगाववादी संगठन हुर्रियत के धड़े ने पुराने शहर की जामा मस्जिद की ओर विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया तथा सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत ने भी पुराने शहर की पाथर मस्जिद की ओर जुलूस निकालने का आह्वान किया। इसको देखते हुए प्रशासन ने शुक्रवार को ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से कोई कर्फ्यू प्रतिबंध नहीं हटाया।

फारूक सहित सैकड़ों लोग जुम्मे की नमाज अदा करने जामिया मस्जिद पहुंचे, जबकि गिलानी को सीने में दर्द की शिकायत के बाद एसकेआईएमएस में भर्ती कराया गया।

प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने बटमालू इलाके से श्रीनगर के जहांगीर चौक तक जुलूस निकाला।

श्रीनगर और घाटी के अन्य प्रमुख शहरों में दुकानें, शैक्षिक संस्थान, बैंक, डाकघर और अन्य कारोबारी संस्थान बंद रहे तथा सार्वजनिक वाहन नहीं चले।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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