भारतीय मछुआरों पर हमलों में कमी आई : कृष्णा
कृष्णा ने आल इंडिया अन्नाद्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के सदस्य वी.मैत्रेयन द्वारा लाए गए एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के बाद कहा, "हाल में एक घटना घटी थी, जिसमें एक मछुआरे की हत्या कर दी गई थी। लेकिन 2008 के बाद ऐसी घटनाओं में कमी आई है।"
कृष्णा ने राज्यसभा में कहा, "मैं द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के लिए जल्द ही श्रीलंका जाने वाला हूं। वहां इस मुद्दे पर श्रीलंका सरकार के साथ बातचीत की जाएगी। भारतीय मछुआरों के मुद्दे को उठाए बगैर श्रीलंका के साथ कोई भी चर्चा पूरी नहीं होती।"
कृष्णा ने कहा कि भारतीय मछुआरों को भी समुद्री सीमा के बारे में संवेदनशील होना चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा, "इस तरह की अधिकांश घटनाएं श्रीलंकाई समुद्र क्षेत्र में घटती हैं, लिहाजा यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने मछुआरों को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा का सम्मान करने के प्रति जागरूक बनाएं।"
कृष्णा ने कहा, "मछुआरे पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए वे मछली मारने के अलावा बाकी और कुछ भी नहीं जानते।"
कृष्णा ने कहा कि श्रीलंकाई नौसेना द्वारा पकड़े जाने वाले मछुआरों की संख्या में कमी आई है। यह संख्या 2008 में 1,456 थी, जो 2009 में घट कर 127 हो गई। वर्ष 2009 में ही श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के साथ जारी युद्ध समाप्त हुआ। उसके बाद जुलाई 2010 में पकड़े गए मछुआरों की संख्या घट कर 26 हो गई।
कृष्णा ने कहा, "वर्ष 2008 में पांच मछुआरों के मारे जाने और एक के लापता होने की खबर थी। वर्ष 2009 में किसी भी मछुआरे के मारे जाने या लापता होने की कोई खबर नहीं थी।"
कांग्रेस और डीएमके के सदस्यों ने मुद्दे के राजनीतिकरण के लिए मैत्रेयन की आलोचना की। इसके बाद गरमागरम बहस शुरू हो गई, परिणाम स्वरूप सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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