ममता के बयान पर विपक्ष ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब
ममता के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार का जमकर घेराव किया। ममता ने अपनी रैली में पिछले महीने आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के जंगलों में एक मुठभेड़ में मारे गए नक्सली नेता और प्रवक्ता चेरुकुरी राजकुमार 'आजाद' को मारने के लिए अपनाए गए तरीके की निंदा।
उन्होंने कहा, "जो हुआ वह ठीक नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति आजाद ने विश्वास जताया था।" पुलिस का दावा रहा है कि आजाद को मुठभेड़ में मारा गया था। जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे फर्जी मुठभेड़ करार देते हैं।
ममता इस के बयान पर मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से स्पष्टीकरण की मांग की है। इस मामले पर हंगामे की वजह से राज्यसभा की कार्यवाही दिन में एक बार स्थगित भी करनी पड़ी। इस मामले में लेफ्ट और राइट यानी वाम दल और भाजपा एक साथ दिखे।
राज्यसभा में इस मामले को नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने उठाया। ममता बनर्जी के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए जेटली ने कहा कि ममता का रुख केंद्र सरकार की नक्सल नीति के बिल्कुल उलट है और प्रधानमंत्री को इस मसले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
इसके साथ ही जेटली ने कहा, "इन दिनों हर मामले पर प्रधानमंत्री चुप रहते हैं। उनकी चुप्पी से सवाल खड़े होते हैं। हमारी मांग है कि खुद प्रधानमंत्री इस मामले में सफाई दें और स्पष्ट करें कि उनका केंद्रीय मंत्री (ममता) के बयान पर क्या रुख है।"













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