ममता के बयान पर हंगामा, प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग (लीड-1)

इस मामले पर हंगामे की वजह से राज्यसभा की कार्यवाही दिन में एक बार स्थगित भी करनी पड़ी। इसके बाद दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों ने इस मामले पर अपनी राय रखी। इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम दल एक साथ दिखे।

राज्यसभा में इस मामले को नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने उठाया। उन्होंने इस संदर्भ में सरकार से सफाई मांगी। भाजपा के एस.एस. अहलूवालिया और अन्य सदस्यों ने भी हंगामा किया। भाजपा सदस्यों की मांग थी कि प्रश्नकाल को रोका जाए और सरकार की ओर से ममता के बयान पर सफाई दी जाए। हंगामा शांत न होने पर सभापति हामिद अंसारी ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।

कार्यवाही दोबारा आरंभ होने पर नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने फिर इस मुद्दे को उठाया। ममता बनर्जी के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए जेटली ने कहा कि ममता का रुख केंद्र सरकार की नक्सल नीति के बिल्कुल उलट है और प्रधानमंत्री को इस मसले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

जेटली ने मंगलवार को शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए कहा, "किसी भी मुद्दे पर सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। मंत्रिमंडल के हर सदस्य को इसी सामूहिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ता है। परंतु एक मंत्री (ममता) ने सरकार की नीति के बिल्कुल उलट बयान दिया है, जिससे सरकार की नीति पर भी सवाल खड़े होते हैं।"

इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "इन दिनों हर मामले पर प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) चुप रहते हैं। उनकी चुप्पी से सवाल खड़े होते हैं। हमारी मांग है कि खुद प्रधानमंत्री इस मामले में सफाई दें और स्पष्ट करें कि उनका केंद्रीय मंत्री (ममता) के बयान पर क्या रुख है।"

लोकसभा में भाजपा के उपनेता गोपीनाथ मुंडे ने प्रश्न काल आरंभ होते ही ममता के बयान का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे। उनकी मांग के समर्थन में भाजपा सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि वे इस मामले को शून्यकाल में उठाएं। थोड़ी देर हंगामा जारी रखने के बाद भाजपा सदस्य लोकसभा अध्यक्ष के आग्रह को मानकर शांत हो गए। प्रश्नकाल खत्म होने के बाद शून्यकाल के दौरान मुंडे के बाद तृणमूल कांग्रेस और माकपा सदस्यों ने भी अपना-अपना पक्ष रखा।

ममता ने सोमवार को लालगढ़ में एक जनसभा में पिछले महीने नक्सलियों के प्रवक्ता आजाद को 'मारने' के लिए अपनाए गए तरीके की निंदा की थी। उन्होंने कहा, "जो हुआ वह ठीक नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति आजाद ने विश्वास जताया था।"

गौरतलब है कि पुलिस का दावा रहा है कि नक्सलियों के तीसरे नंबर के नेता आजाद आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के जंगलों में मुठभेड़ में मारा गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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