ममता ने आजाद को 'मारने' के 'तरीके' की निंदा की
नक्सलियों के प्रभाव वाले पश्चिमी मिदनापुर जिले में एक विशाल रैली में उन्होंने कहा, "मैं महसूस करती हूं कि जिस तरह आजाद को मारा गया वह ठीक नहीं है।" उन्होंने नक्सलियों के इस आरोप का लगभग समर्थन किया कि आजाद को फर्जी मुठभेड़ में मारा गया।
पुलिस ने दावा किया था कि नक्सलियों के तीसरे नंबर के नेता आजाद की आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के जंगलों में मुठभेड़ में मौत हो गई।
बनर्जी ने कहा कि नक्सलियों और सरकार के बीच वार्ता के मध्यस्थ सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने आजाद को वार्ता के लिए तैयार किया था।
संत्रास विरोधी फोरम के तहत आयोजित एक गैर राजनीतिक रैली में बनर्जी ने कहा, "जो हुआ वह ठीक नहीं है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति आजाद ने विश्वास जताया था।"
नक्सल समर्थन जनजातीय संस्था पुलिस संत्रास विरोधी जन समिति (पीसीएपीए) ने इस रैली को समर्थन दिया। इस रैली में अग्निवेश, मेधा पाटकर और नक्सल समर्थक लेखिका महाश्वेता देवी जैसे कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे सबसे बड़े घटक की नेता बनर्जी ने आजाद की मौत पर शोक जताया।
अग्निवेश ने आजाद के मारे जाने की घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने अपने संचार माध्यमों का इस्तेमाल करके नक्सली नेता का पता लगाया और उसे मार दिया।
नक्सलियों का कहना है कि आजाद और एक अन्य कार्यकर्ता हेमचंद्र पांडे को पुलिस ने गत एक जुलाई को नागपुर से उठाया था और अगले दिन आदिलाबाद में मार डाला था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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