ममता की लालगढ़ रैली पर लोकसभा में हंगामा
प्रश्नकाल आरंभ होते ही वामपंथी दलों के सदस्यों ने इस मामले को उठाना चाहा लेकिन तृणमूल सदस्यों ने इसका जोरदार विरोध किया। संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल और संसदीय कार्य राज्यमंत्री वी. नारायणसामी को दोनों दलों के सदस्यों को समझाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। वामपंथी सदस्य बाद में इस मामले को उठाने को राजी हो गए।
शून्य काल खत्म होते ही फिर वामपंथी सदस्यों ने इस मामले को उठाया लेकिन तृणमूल सांसदों ने इसका कड़ा प्रतिकार किया। हंगामा बढ़ता देख लोकसभा अध्यक्ष ने दोनों दलों के नेताओं को दो-दो मिनट बोलने का मौका दिया।
माकपा के ए. संपत ने कहा, "देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक कह चुके हैं कि नक्सली समस्या देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है और नक्सलियों ने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है।"
उन्होंने कहा, "ऐसे में तृणमूल कांग्रेस लालगढ़ में नक्सलियों के साथ मिलकर रैली कर रही है। इस रैली में रेल मंत्री खुद हिस्सा ले रही हैं। एक जिम्मेदार राजनीतिक दल ऐसा गैरजिम्मेदाराना व राष्ट्रविरोधी काम कर रहा है। सरकार को इस मसले पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।"
तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस की कोशिश शांति का संदेश देने की है। हमने हमेशा हत्या व हिंसा की राजनीति का विरोध किया है।"
उन्होंने कहा, "कुछ माह पहले केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने भी लालगढ़ का दौरा किया था ऐसे में तृणमूल कांग्रेस यदि रैली करती है तो क्या नुकसान है।"
बंदोपाध्याय ने कहा, "रैली में कौन हिस्सा लेगा और कौन नहीं यह पहले से कोई कैसे कह सकता है।"उन्होंने कहा कि वैसे भी नक्सली माकपा की ही देन हैं। दोनों में कोई अंतर भी नहीं है।
इसके बाद एक बार फिर माकपा सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया लेकिन लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार इसे राज्य का मामला बताकर किसी तरह सदस्यों को मनाने और शांत करने में सफल रही।
उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी सोमवार को लालगढ़ में एक रैली कर रही है। इस रैली में बड़ी संख्या में नक्सल समर्थकों और नक्सल समर्थक पुलिस संत्रास विरोधी जन साधारण कमेटी (पीसीएपीए) के सदस्यों के हिस्सा लेने की संभावना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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