लेह त्रासदी : 500 लोग लापता, राहत कार्य जारी (राउंडअप)

श्रीनगर/जम्मू, 8 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के लेह शहर में बादल फटने के बाद आई बाढ़ के दो दिन बाद रविवार को एक स्पेनी पर्यटक सहित 500 से अधिक लोग अभी तक लापता हैं। इस आपदा में 132 लोगों की मौत हुई है और भारी विनाश हुआ है। इस बीच एयर इंडिया के विमानों ने राहत सामग्री पहुंचाने तथा शवों को लाने का काम शुरू कर दिया है।

पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर क्षेत्र) फारूक अहमद ने रविवार को कहा कि अब तक 111 शवों की पहचान की जा चुकी है, इनमें किसी विदेशी नागरिक का शव नहीं है। राहत दल को लेह के समीप के छह गांवों में भेजा गया है लेकिन राहत कार्य शुरू करने के लिए वह अभी तक पहुंच नहीं पाया।

अहमद ने कहा कि दुर्घटना में 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं और इनमें एक स्पेनी नागरिक का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।

राहत कार्य के दौरान मौत के शिकार हुए चार पुलिसकर्मियों के शवों को विमान से श्रीनगर लाया गया है जहां उन्हें औपचारिक श्रद्धांजलि दी गई। बाद में शवों को लद्दाख क्षेत्र के कारगिल शहर भेज दिया गया। ये पुलिसकर्मी वहीं से आए थे।

अहमद ने कहा कि चिकित्साकर्मी और राहत आपूर्ति पहुंचनी शुरू हो गई है और फंसे पर्यटकों को निकालने के लिए विशेष उड़ानें शुरू हो गई हैं।

स्तब्ध स्थानीय लोग त्रासदी से उबरने का प्रयास कर रहे हैं। त्रासदी उस लेह शहर में हुई है जो भारतीयों और विदेशियों के बीच लोकप्रिय रहा है।

बादल फटने की घटना के बाद कई महत्वपूर्ण इमारतें ढह गईं और बाढ़ में काफी घर बह गए। हताश लोगों ने साहस जुटाया और सुरक्षित स्थानों पर चले गए।

आपदा से सकते में आए लोग अपने घरों के मलबे में सगे संबंधियों की तलाश में लगे हैं। इनमें से कुछ ही जीवित बचे, शेष उतने भाग्यशाली नहीं रहे।

पर्यटक कस्बे से जल्दी से जल्दी बाहर निकलने के लिए हवाई अड्डे पर एकत्र हो गए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री गुलाम नबी आजाद चिकित्सकों के एक दल के साथ शनिवार को लेह पहुंचे थे। विमान में दवाएं, खाद्य पदार्थ और तंबू भी थे। वायुसेना ने भी दो विमानों में राहत सामग्री भेजी है। फंसे हुए पर्यटकों को निकालने के लिए वायुसेना के विमानों ने उड़ानें शुरू कर दी हैं।

पुलिस ने करीब 2,000 प्रभावित लोगों के लिए लेह शहर और चोगलमसार गांव में रहने की व्यवस्था की है।

बचाव और राहत कार्य में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सेना के करीब 6,000 जवान तैनात किए गए हैं। प्रभावित इलाकों में सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है।

बाढ़ से एक पॉलीटेक्निक कॉलेज, भारत संचार निगम लिमिटेड का मुख्यालय, ऑल इंडिया रेडियो केंद्र और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के शिविर सहित कई सरकारी कार्यालय और इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुईं हैं।

बीएसएनएल के महाप्रबंधक ने कहा कि आरंभिक अनुमान के अनुसार उपकरणों के क्षतिग्रस्त होने से करीब 12 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

बीएसएनएल मुख्यालय क्षतिग्रस्त होने से लेह से संपर्क बाधित है। लेह इलाके में एक अन्य सेवा प्रदाता कंपनी एयरटेल ने हेल्पलाइन स्थापित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को सिम कार्ड दिए।

जम्मू से मिली खबर के मुताबिक लेह क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए अधिक विमान लगाने के साथ ही वायुसेना ने शवों को लाने का भी काम शुरू कर दिया है।

सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि चंडीगढ़ और दिल्ली के अलावा वायुसेना के विमान अब जम्मू और उधमपुर से भी राहत सामग्री उठा रहे हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि एक आईएल-76 और एएन-32 मालवाहक विमान ने रविवार को राहत सामग्री और मलबा हटाने के काम आने वाली मशीनों के साथ जम्मू और उधमपुर से लेह के लिए उड़ान भरी। ये मशीनें सेना की उत्तरी कमान ने उपलब्ध कराई हैं।

दो एएन-32 विमान के जरिये लेह में निर्माण कार्य में लगे 11 मजदूरों के शवों को उधमपुर लाया गया। शवों को जिला प्रशासन के हवाले कर दिया गया। मारे गए अधिकांश लोग जम्मू क्षेत्र के किश्तवाड़ इलाके के हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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