पाकिस्तानी सेना से सीधे संपर्क की कोई योजना नहीं : भारत (लीड-1)
सीएनएन-आईबीएन के कार्यक्रम 'डेविल्स एडवोकेट' में एक साक्षात्कार में जब मेजबान करन थापर ने राव से पूछा कि क्या भारत को पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक परवेज कयानी से सीधा संपर्क स्थापित करने की आवश्यकता है? तो उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार और संबंधित नागरिक अधिकारियों से वार्ता जारी रखेंगे। हमने यही तरीका अपनाया है।"
यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तानी सरकार के साथ सेना से संपर्क स्थापित किया जा सकता है? राव ने कहा, "मैं इस समय इस बारे में बात करने को तैयार नहीं हूं। परंतु मेरा कहना है कि नागरिक सरकार के साथ संपर्क कायम हैं।"
अफगानिस्तान में भारत विरोधी हमलों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसिज इंटेलीजेंस (आईएसआई) की भूमिका का खुलासा अमेरिकी वेबसाइट विकिलीक्स द्वारा किए जाने के बावजूद विदेश सचिव ने पाकिस्तान से वार्ता जारी रहने की वकालत की।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ विवादित मुद्दों को सुलझाने का सबसे अच्छा रास्ता वार्ता है। भारत चाहता है कि पाकिस्तान उसके खिलाफ आतंकवाद फैलाना बंद करे और वार्ता रोकने से इस उद्देश्य में कोई मदद नहीं मिलेगी।
जब यह कहा गया कि कयानी के कार्यकाल में अफगानिस्तान में भारतीय संपत्तियों पर हमले हुए तो राव ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
राव का कहना है कि युद्ध से तबाह देश अफगानिस्तान इतना तो आत्मनिर्भर है कि वह पाकिस्तान को अपनी संप्रभुता और धीरे-धीरे हो रही अपनी प्रगति में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा।
राव ने कहा, "अफगानिस्तान एक स्वतंत्र देश है। हाल में अफगान नेतृत्व से हुई मुलाकातों से हमें संकेत मिला है कि वे अपनी स्वतंत्रता और पिछले नौ वर्षो के दौरान हासिल उपलब्धियों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्साहित हैं।"
अफगान समस्या के हल में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद क्या अफगानिस्तान में पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ेगा, इस सवाल के जवाब में राव ने उपरोक्त टिप्पणी की।
विदेश सचिव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, "वे वहां आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए मेरा मानना है कि वहां अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति को मजबूत करने की प्रतिबद्धता है।"
यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान समर्थित गुलबुद्दीन हिकमतयार और जलालुद्दीन हक्कानी जैसे मुजाहिदीन नेताओं के करजई सरकार में शामिल होने की संभावना को भारत किस तरह देखता है, राव ने कहा कि लंदन सम्मेलन में एक सीमा रेखा तय की गई थी। उनका इरादा इसका पालन करने और इस पर टिके रहने का था।
उन्होंने कहा, "यह सही है कि अफगान तालिबान में ऐसे समूह हैं जो पाकिस्तान के करीब हैं। मुझे विश्वास नहीं है कि अफगान सरकार ने उनको प्रशासन में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।"
राव का कहना है कि भारत और चीन के संबंध जटिल हैं लेकिन दोनों पड़ोसियों के संबंध '21वीं सदी की बड़ी घटना' होंगे।
राव ने कहा कि समझदारीपूर्ण वार्ता दोनों देशों को अपने मुद्दों को सामने रखने में मददगार होगी। इससे इन मुद्दों पर जवाबदेही और समझदारी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा, "मेरा विश्वास है कि भारत और चीन के संबंध 21वीं सदी की बड़ी घटना होंगे।"
उन्होंने कहा, "ये संबंध संवाद पर आधारित होंगे। हमारा इरादा इसे बुद्धिमानी और भरोसे से चलाने का है। इससे हम अपने हितों को हमेशा के लिए सुरक्षित कर रहे हैं।"
चीन में भारत की राजदूत रह चुकी राव ने कहा कि एशिया के दोनों देशों के बीच न केवल बहुआयामी, बहुक्षेत्रीय संवाद है वरन दोनों बहुपक्षीय मुद्दों पर एक दूसरे से परामर्श करते हैं।
उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय मोर्चे पर चीन के साथ बहुक्षेत्रीय संवाद है और वैश्विक बहुपक्षीय मोर्चे पर सहयोग के क्षेत्रों में वृद्धि हो रही है।
भारत और चीन के बीच वर्ष 1962 में युद्ध हो चुका है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़कर इस वर्ष के अंत तक 60 अरब डॉलर होने की उम्मीद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications